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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    यत्तु कामेप्सुना कर्म साहंकारेण वा पुनः ।
    क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् ॥१८- २४॥

    परन्तु जो कर्म बहुत परिश्रम से युक्त होता है तथा भोगों को चाहने वाले पुरुष द्वारा या अहंकारयुक्त पुरुष द्वारा किया जाता है, वह कर्म राजस कहा गया है॥24॥

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Krishna Kutumb
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