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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः ।
    विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते ॥१८- २८॥

    जो कर्ता अयुक्त, शिक्षा से रहित घमंडी, धूर्त और दूसरों की जीविका का नाश करने वाला तथा शोक करने वाला, आलसी और दीर्घसूत्री (दीर्घसूत्री उसको कहा जाता है कि जो थोड़े काल में होने लायक साधारण कार्य को भी फिर कर लेंगे, ऐसी आशा से बहुत काल तक नहीं पूरा करता। ) है वह तामस कहा जाता है॥28॥

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