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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्त-
    दग्रेऽमृतोपमम् ।
    परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम् ॥१८- ३८॥

    जो सुख विषय और इंद्रियों के संयोग से होता है, वह पहले- भोगकाल में अमृत के तुल्य प्रतीत होने पर भी परिणाम में विष के तुल्य (बल, वीर्य, बुद्धि, धन, उत्साह और परलोक का नाश होने से विषय और इंद्रियों के संयोग से होने वाले सुख को 'परिणाम में विष के तुल्य' कहा है) है इसलिए वह सुख राजस कहा गया है॥38॥

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Krishna Kutumb
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