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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
    स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् ॥१८- ४७॥

    अच्छी प्रकार आचरण किए हुए दूसरे के धर्म से गुणरहित भी अपना धर्म श्रेष्ठ है, क्योंकि स्वभाव से नियत किए हुए स्वधर्मरूप कर्म को करता हुआ मनुष्य पाप को नहीं प्राप्त होता॥47॥

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