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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    श्रद्धावाननसूयश्च शृणुया-
    दपि यो नरः ।
    सोऽपि मुक्तः शुभाँल्लोकान्-
    प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम् ॥१८- ७१॥

    जो मनुष्य श्रद्धायुक्त और दोषदृष्टि से रहित होकर इस गीताशास्त्र का श्रवण भी करेगा, वह भी पापों से मुक्त होकर उत्तम कर्म करने वालों के श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त होगा॥71॥

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