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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा ।
    कच्चिदज्ञानसंमोहः प्रनष्टस्ते धनंजय ॥१८- ७२॥

    हे पार्थ! क्या इस (गीताशास्त्र) को तूने एकाग्रचित्त से श्रवण किया? और हे धनञ्जय! क्या तेरा अज्ञानजनित मोह नष्ट हो गया?॥72॥

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