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  • सञ्जय उवाच

    सञ्जय उवाच -
    इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः ।
    संवादमिममश्रौष-
    मद्भुतं रोमहर्षणम् ॥१८- ७४॥

    संजय बोले- इस प्रकार मैंने श्री वासुदेव के और महात्मा अर्जुन के इस अद्‍भुत रहस्ययुक्त, रोमांचकारक संवाद को सुना॥74॥

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