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Keshavkripa

मनत्र या भजन, इनमें से भगवान् की पूजा के लिए क्या सर्वोत्तम है?

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  • Shiv DasDevotee

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    भजन का तात्पर्य होता है परमात्मा को भजना।चाहे आप नाम से भजें या मंत्र से । मंत्र उद्देश्य विशेष होते हैं अर्थात लगभग सभी मंत्र में परमात्मा से किसी न किसी इच्छा पूर्ति की प्रार्थना की जाती है। आप साधारण तरीके से भजन करते हैं तो भी कोई इच्छा चाहें तो उनसे पूरी करने हेतु प्रार्थना कर सकते हैं। मन्त्र के विशेष नियम होते हैं परंतु नाम जप, गुणों को याद करना ये नियम नहीं आपके भावनाओं से बंधे होते हैं।उन्हें आप नाम से भजें, गुणों को कीर्तन (भजन) करें, चाहे किसी विशेष मन्त्र से भजें अन्त में आपकी उनके प्रति प्रेम और उन पर विश्वास ही आपको सफलता देती है। मन्त्र भी तो प्रार्थना ही है अन्तर सिर्फ इतना ही है कि वे संस्कृत में होते हैं। नाम तथा गुणों का भजन और मन्त्र जप दोनों सही है महामृत्युंजय मंत्र से बीमार व्यक्ति को स्वस्थ किया जाता है , भजन से तुलसीदास जी मृत व्यक्ति को जीवित कर दिये । जो महानभक्त हैं सुदामा,प्रह्लाद नारद इत्यादि वे नाम और गुणों को भजते हैं । दोनों ही सर्वोत्तम हैं किंतु आपका प्रेम और विश्वास ही आपकी सफलता का मापदंड सुनिश्चित करती है । जय श्रीकृष्ण । शिव शिव शिव...

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