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सबसे बड़े भगवान कौन हैं ?

मुझे यह जानना है सबसे बड़े भगवन कौन हैं १ क्या वह शिव हैं , क्या वो विष्णु हैं , क्या वो ब्रह्मा हैं , क्या वो कृष्णा हैं , क्या वो राम हैं !

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  • Md Javed Md Javed

    मै माँ वैष्णोदेवी देवी की पूजा करता हूं और उन्हे दिल से मानते हुए अपने हृदय मे बसा रखा हु मै जब दिल से याद करता हू मुझे माँ की कृपा ्‍यएहसास होती हैं इससे हमे ये मालूम होता है कि हम जिसे भी दिल चाहे वही शक्ति हमारे लिए सबसे बड़ी होती हैं हम उसे ही अपने जीवन उतार लेते हैं और ये सत्य है सारी शक्ति उसी का साथ देती हैं जय माता दी 

  • Shiv Das

    यदि आप शप्तशती अध्याय पढ़ते हैं तो दुर्गा माँ (आदिशक्ति)कहती हैं कि मैं सबसे बड़ी हूँ, यदि आप गीता पढ़ते हैं तो कृष्ण कहते हैं सबकुछ मैं ही हूँ, यदि आप शिव महापुराण पढ़ते हैं तो शिव ही परमात्मा हैं तथा रामायण में राम। वास्तव में एक ही परमात्मा है दूसरा नहीं तो वे कौन हैं ? शिव महापुराण के अनुसार सदाशिव जी के एक भुजा से विष्णुजी तथा दूसरी भुजा से ब्रह्मा जी अवतरित हुए तथा सदाशिव जी के हृदय से शंकर जी अर्थात सदाशिव की दोनों भुजाएं ब्रह्मा विष्णु स्वरूप हैं और हृदय शंकर स्वरूप।किन्तु शिवमहापुराण में ब्रह्मा जी नारद जी से स्पष्ट कहते हैं कि जो मुझमे नारायण में तथा शंकर में अंतर मानता है वो दुख पाता है क्योंकि वे अलग नहीं है एक ही हैं।

    चार युग होते हैं इन चतुर्युग को मिलाकर एक कल्प होता है।किसी कल्प में ब्रह्मा जी विष्णु जी के पुत्र बनते हैं तो किसी कल्प में विष्णु जी ब्रह्मा जी के ऐसा शिव जी के साथ भी होता है।उदाहरण शिव महापुराण से इस प्रकार है - एक बालक जो ब्रह्मा जी के दोनों भौंहो के बीच से प्रकट हुए उनके रोने के कारण ब्रह्मा जी ने उनका नाम रुद्र रखा वे रुद्र साक्षात शिव जी हैं अर्थात यहाँ वे ब्रह्मापुत्र हुए। काशी में शिव जी पार्वती माँ की इच्छापूर्ति हेतु संसार का पालन करने के लिए एक सर्वगुण सम्पन्न पुरुष की रचना किये जो स्वयं शिव समान पूज्यनीय हए उनका नाम विष्णु जी है इस प्रकार विष्णु जी शिवपुत्र हुए ।विष्णु जी के नाभि से कमल उत्पन्न हुआ उनमे ब्रह्मा जी प्रकट हुए वे अब विष्णुपुयर कहलाये । यह सब चलता ही रहता है ये एक दूसरे के पिता - पुत्र बनते रहते हैं।सामान्यत: भक्तजन यही भ्रमित होते हैं उन्हें लगता है कि ये इनके पुत्र हैं तो छोटे है किंतु ऐसा नही है।
    एक ही तत्व हैं दूसरा नही। वही परम तत्व संसार की रचना हेतु ब्रह्मा हुए,पालन हेतु विष्णु हुए और संहार हेतु शंकर हुए।इसी प्रकार वही परम तत्व माता सरस्वती,माता लक्ष्मी तथा माँ पार्वती हुईं।मैं यहाँ भगवान नहीं ईश्वर अर्थात परमात्मा की बात कर रहा हूँ ।भगवान आप भी बन सकते है, मैं भी बन सकता हूँ भगवान और ईश्वर में अंतर है।आप ये समझिए कि प्रत्येक अंशी (ईश्वर का अंश) भगवान बन सकते हैं किंतु ईश्वर कोई नहीं क्योंकि ईश्वर अंशी नहीं अंश हैं।उन परमतत्व (ईश्वर)को शिव महापुराण में सदाशिव कहा गया है किंतु शिवमहापुराण में कहा गया कि सदाशिव निराकार परमात्मा हैं और शंकर साकार अर्थात वही परमेश्वर जो सदाशिव हैं जब शरीर धारणकर कैलाश में वास किये तो शंकर कहलाये दोनों में कोई भेद नहीं ऐसे ही आप नारायण और ब्रह्मा जी को भी मानिये।आप यह मत सोचिये की परमात्मा कौन हैं आप ये जानिये की वो परमात्मा संसार की रचना,पालन तथा संहार करने के लिए क्रमश:ब्रह्मा,विष्णु और शिव ऐसे तीन रूप धारण किये हैं।वास्तव में आप भी उन परमात्मा के ही रूप हैं किंतु वे सागर हैं तो आप उनकी बूँद उन सागर को आप ब्रह्मा,विष्णु,महेश तीनों में से कुछ भी कह लीजिये। वही अथाह सागर त्रिदेवियाँ बनीं जैसे शिव पार्वती माँ एक ही हैं(अर्धनारीश्वर रूप) ऐसे ही ब्रह्मा सरस्वती माता तथा लक्ष्मीनारायण जी भी एक ही हैं इस प्रकार ये छह से तीन हुए और मूलरूप में ये त्रिदेव एक हो जाते हैं।आप गीता पढ़िये आपको ये बात ज्यादा अच्छे से समझ आयेगी।शिवहरि आप पर कृपा करें।शिव शिव शिव...

  • Akash Mittal

    कृष्ण रूप में भगवान, नारायण और शिव को पूजते थे। शिव, कृष्ण के बाल स्वरुप का दर्शन करने कैलाश से दौड़े चले आये थे। दोनो ने एक दुसरे के चरण धूल अपने माथे पर लगाई थी। श्री राम ने शिव का पूजन किया था और उनका आशीर्वाद लिया था। हनुमान जी शिव के ही रूप हैं और वो श्री राम के सेवक हैं।

    नारायण, शिव को अपना प्रभु बोलते हैं और शिव, नारायण को। कौन बड़ा है और कौन छोटा ये कोई नहीं बता सकता।

    जब शिव से पुछा गया कि आपके पिता कौन है, तो उन्होंने कहा ब्रह्मा। तो दादा कौन है? विष्णु। तो परदादा कौन है? तो उन्होंने उत्तर दिया - शिवा।

    जब शिव और विष्णु एक हो जाते हैं तो उन्हें कहते हैं - हरिहर।

    इसलिए, ये ईश्वर हैं इन्हे समझना आसान नहीं।

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