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Keshavkripa

गीता जी या श्रीमद् भागवत जी, दोनों में किसे पढना सरल और सहज है?

Kuch sajjan kehte hai ki geetaji padiye..

Kuch kehte hai shrimad bhagwat..

Kuch log राम चरित मानस ko सर्वोत्तम बताते हैं।

Navratro me durga saptshati, sawan me shiv mahapuran, bhramvavart puran

Mai inko baari baari se padta hoon.

Kya mera ye tarika sahi hai?

|5|2
  • शिव दासशृद्धालु

    |3|7|0

    जो सज्जन गीता पढ़ते हैं कहते हैं कि गीता पढ़ना सबसे अच्छा है,राम रसिक रामायण,रामचरितमानस पढ़ना सबसे अच्छा है कहते हैं,शिवोपासक कहते हैं शिव महापुराण और शाक्त कहते हैं कि शप्तशती अध्याय।

    वास्तव में ये सभी धर्म ग्रंथ अपने आराध्य की भक्ति के साधन हैं इसलिए ये सभी सही है।

    यदि आप जानना चाहते हैं कि सर्वश्रेष्ठ कौन हैं तो इसका उत्तर मैं नही दे सकता क्योंकि एक परमतत्व जिन्हें परमात्मा कहते हैं उनके राम रूप का वर्णन रामायण,रामचरित मानस,शिव रूप का वर्णन शिवमहापुराण,दुर्गा माँ रूप का वर्णन शप्तशती अध्याय में है।

    हाँ ये जरूर कह सकता हूँ की

    यदि आप शिव से प्रेम और शिव पर विश्वास करते हैं तो आपको विशेष रूप से शिवमहापुराण पढ़ना चाहिए।आप भले ही रामायण इत्यादि पढ़ें किन्तु आपको प्रतिदिन और जितना ज्यादा हो सके शिवमहापुराण पढ़ना चाहिए इससे आपके हृदय में जो शिव जी के प्रति विश्वास और प्रेम है वो बढ़ेगा।साथ मे आपको रुद्राक्ष धारण,शिव नाम या ॐ नम: शिवाय जप भी मानसिक रूप से निरंतर करना चाहिये किन्तु अन्यों को तुच्छ समझने की भूल कभी न कीजियेगा क्योकि जो विष्णु जी,ब्रह्मा जी से द्वेष करते हैं वे कभी शिव को प्रिय नही हो सकते।आप रुद्राक्ष में एक मुखी धारण कीजिये ये शिव स्वरूप हैं।

    यदि आपकी श्रद्धा दुर्गा माँ में है,सरस्वती माता में है या लक्ष्मी माता में है या अन्य देवी माताओं में आपकी श्रद्धा है तो आपके लिए शप्तशती अध्याय पढ़ना ज्यादा सही होगा।आप माता को दिनभर मन में स्मरण नाम जप द्वारा भी करते रहिएगा।आप नौ मुखी रुद्राक्ष धारण कीजिये इससे आपको लाभ मिलेगा।

    यदि आपकी श्रद्धा हनुमान जी मे है तो आप हनुमान चालीसा,रामचरितमानस,रामायण का पाठ कीजिये ये ज्यादा सही होगा आपके लिये।यदि आप रामचरितमानस या रामायण से सुंदरकांड का पाठ करते हैं तो ये और भी ज्यादा सछि है।आप मन से सदा हनुमान नाम को स्मरण करते रहिये।यदि आप हनुमान जी के भक्त हैं तो ग्यारह मुखी,चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करें आपको विशेष लाभ होगा।आप तुलसी माला भी धारण कर सकते हैं।

    यदि आप रामभक्त हैं जो कि श्रीहरि जी हैं तो आप रामचरितमानस,रामायण पढ़ें, राम नाम निरंतर जपें।तुलसी माला धारण करें यदि आप रुद्राक्ष धारण करना चाहते हैं तो दस मुखी धारण करें इससे राम जी की ज्यादा कृपा होगी।आप सत्रह मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं यह मत सीता और प्रभु श्रीराम जी के प्रतीक हैं।

    यदि आपकी श्रद्धा कृष्ण जी मे अधिक है अर्थात आप यदि श्रीहरि स्वरूप कान्हा जी के भक्त हैं तो

    आप श्रीमद्भागवत महापुराण पढ़िये इन्हें श्रीकृष्ण स्वरूप माना गया है।इनसे आपके मन मे कृष्ण जी के प्रति विशेष प्रेम और विश्वास बढ़ेगा।

    यदि आप महाभारत पढ़ते हैं तो भी कृष्ण प्रसन्न होंगे इनके नित्य पाठ से जीवन मे जो कठिन परिस्थितियाँ आती हैं उनका सरलता पूर्वक सामना करने हेतु विशेष बुद्धि कन्हैया प्रदान करते हैं।

    यदि आप ज्ञान प्राप्ति चाहते हैं तो गीता पढ़िये।उनसे भी कृष्ण जी की विशेष कृपा आपको मिलेगी गीता कृष्ण जी की अक्षररूपी अवतार हैं।जिनके पाठक मोहन को अत्यंत प्रिय होते हैं।गीता पाठ से आपको ज्ञानयोग,कर्मयोग,भक्तियोग का ज्ञान प्राप्त होगा ये तीन ही योग है।तत्वज्ञान की प्राप्ति हेतु आप दूसरे अध्याय का पाठ कर सकते हैं।तीनों लोकों में तथा अमस्त ब्रम्हांडों में वह ज्ञान नही जो गीता के ज्ञान से बाहर हो अर्थात गीता सम्पूर्ण ज्ञान है।

    आपको रुद्राक्ष में दस मुखी धारण करने चाहिये।आप बीस मुखी भी धारण कर सकते हैं।आप तुलसी माला धारण कर सकते हैं आपको निरंतर कृष्ण नाम जप करना चाहिये।

    काशी कैलाश वास शिव भक्तों के लिए,वृंदावन,मथुरा,अयोध्या वास हरि भक्तो के लिए विशेष लाभदायक होता है।यहाँ न रह सकें तो वहां कम से कम दर्शन करने जाने का अवश्य प्रयास करना चाहिये।

    शिव,हरि(राम,कृष्ण,विष्णुजी)देवी माताएं और पार्वती माँ इनकी प्रसन्नता हेतु आप कोई भी रुद्राक्ष या रुद्राक्ष की माला,तुलसी माला तथा पवित्र स्थल धारण कर सकते हैं किंतु जो ऊपर बताए गए हैं उन्हें धारण करने का विशेष फल है।

    आप जब नवरात्रि आती है शप्तशती अध्याय पाठ करते हैं, शिवरात्रि,सावन में शिवमहापुराण तथा आप रामायण,गीता,भागवत,महाभारत पढ़ते हैं तो इन सब मे बिल्कुल कोई दोष नहीं है आप जो चाहे वो तथा जब चाहे तब इन सब का पाठ कर सकते हैं।शिव शिव शिव ....