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रामदेवसिंह ज़ल

sradh paxa

sradh kauvo ko hi kyu dala jata h Aur pakshi ko kyu nahi?? is k pichhe kya vjah ho sakti h kus na kus dharmik vajh hogi me ye janna chahunga please

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  • Anjesh Mittalशृद्धालु

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    कौओ की कहानी यह है कि : एक बार भगवन राम माता सीता के साथ वन में विहार करने गए तब वो आराम करने वृक्ष के नीचे सीता माँ के गोद में सर रखकर सो गए | उस वक्त इंद्रा का पुत्र जयंत कौवे का रूप रखकर आया और माता सीता की परीक्षा लेने के लिये उसने सीता माँ के हाथ में चौंच से वार करने लगा सीता माँ सहन करती रही क्योकि वो नहीं चाहती थी भगवन राम की नींद खुल जाये

    परंतु भगवन की नींद खुल गयी ये देखकर उन्हें कौवे पर बहोत क्रोध आया उन्होंने एक तिनके पर वृहमास्त्र का मंत्र पढ़कर जयंत को मारा वो तीनो लोको में भगा परंतु बच नही पाया तब अंत में जाकर वो राम जी के चरणों में गया तब भगवन ने उसकी एक आँख फोड़कर उसे काना कर दिया और उसे वरदान दिया की वो एक आँख से लोगो के पितरो को देख पायेगा और उसे (कौवे) को जो भी खिलायेगा वो पितरो को पहोचेगा और पित्र तृप्त रहेंगे| इसलिए कौओ को खाना खिलते है|

  • Akash Mittalआंतरिक टीम सदस्य

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    कौवे के साथ साथ कुत्तों को भी भोजन कराया जाता है। में ये तो नहीं जानता कि ऐसा क्यों किया जाता है परन्तु एक कहानी है जो मुझे पता है कुत्ते की

    जब पांडव स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर रहे थे तब उनके साथ एक कुकूर भी गया था। युधिष्ठिर को छोड़ कर बाकी चारो पांडव भाई और द्रौपदी रास्ते में ही गिर गए थे परन्तु युधिष्ठिर और कुकूर पहाड़ को पार कर गए थे। तब इन्द्र अपने रथ पर उन्हें लेने पहुंचे। युधिष्ठिर ने कुकूर को भी साथ ले जाने के लिए कहा परन्तु इंद्रा नहीं माने। तो युधिष्ठिर बोले कि इस कुकूर ने मेरे पूरे मार्ग पर मेरा साथ दिया है। जितना में स्वर्ग का अधिकारी हूँ उतना ही ये कुकूर। अगर इसके लिए स्वर्ग में जगह नहीं है तो मेरे लिए भी नहीं है। इंद्र ने युधिष्ठिर को वापस जाने से रोका और अगले ही पल वो कुकूर धर्मराज यमराज के रूप में सामने खड़ा था। ये युधिष्ठिर की अंतिम परीक्षा थी जो उन्होंने अपने धर्मप्रेम से पूर्ण की थी।

    इसलिए शायद कुत्ते का भी श्राद्ध पक्ष में बहुत महत्व होता है।

  • Akash Mittalआंतरिक टीम सदस्य

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    श्राद्ध में यमराज जी का महत्व होता है। कहा जाता है कि श्राद्ध के 16 दिन के लिए यमराज सभी आत्माओं को अपने वंशजों से मिलने की अनुमति दे देते हैं।

    कौवा यमराज जी का दूत माना जाता है। यानि कि वो यमराज जी को सन्देश पहुँचता है। कौवे के द्वारा ग्रहण किया हुआ भोजन भी यमराज और हमारे पितरों को पहुँचता है। इसलिए कौवे का पितृ पक्ष में बहुत महत्व होता है।

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