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कृपया इस मंत्र का अर्थ समझाएं।

एवं विनायकं पूज्य ग्रहांश्चैव विधानतः। कर्माणाम फलमाप्नोति श्रिया माप्नोत्यनुत्तमम।।

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  • Sudhish Malhotra

    Shri Ganesha is the destroyer of all interruptions. In all auspicious works Shri Ganesha is worshiped first of all for its completion without any hindrance. Besides it the idea is that result of the work must be achieved and riches also got. The custom that the worship of 'Navgrah' (nine planets) is done after it.

    In *'Aacharaadhyay'* 292 of *Yagyavalkya Smriti* the above 'Shloka' denotes the same.

  • Ratnesh Kumar Sahu

    श्लोक -
    एवं विनायकं पूज्य ग्रहांश्चैव विधानत: ।।
    कर्मणां फलमाप्नोति श्रियं प्राप्नोत्यनुत्तमम् ।।

    श्लोकार्थ -
    इस प्रकार विधान सहित विनायक (गणेश जी) और ग्रहों का पुजन करने रूपी कर्म का फल अत्युत्तम लाभ के रूप में प्राप्त होता है।

    टिप -
    यह महात्म्य है, विधान (नियम) क्या है आप इसे इस श्लोक के शेष श्लोकों में देखिए।
    शिव शिव शिव...

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