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Sana Gopika Adani

निष्क्रमण संस्कार क्यों किया जाता है?

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  • Vasanta Suketuशृद्धालु

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    जब नवजात शिशु को पहली बार घर से बाहर ले जाया जाता है तो उस महोत्सव को *निष्क्रमण संस्कार* कहते हैं, इसके विषय में कहा गया है -

    *निष्क्रमणादयुषो वृद्धिरप्युद्दिष्ट मनीषिभिः।*

    अर्थात निष्क्रमण संस्कार का लक्ष्य नवजात शिशु की लम्बी उम्र और अच्छी सेहत है।

    इस विषय में अथर्ववेद के श्लोक 8, 2, 14 में कहा गया है -

    *शिवे तेस्ताम द्यावापृथिवी असंतापे अभिश्रीयु,

    शाम ते सूरिया आतप तोशाम वातो वातु ते हृदय।

    शिवा अभिरक्षन्तु त्वापो विद्याः पयस्वतीः।*

    अर्थात, हे पुत्र! ध्युलोक और पृथ्वीलोक में तुम्हारा निष्क्रमण का समय भाग्यशाली और सुन्दर रहे। सूर्य तुम्हे अपनी किरणों से सौभाग्य प्रदान करे। स्वच्छ और मधुर वायु तुम्हारे ह्रदय में पहुंचे। गंगा - यनुमा जैसी पावन नदियाँ तुम्हारे लिए साफ़ और मीठा पानी बहाये। .

  • Ratnesh Kumar Sahu

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    निष्क्रमण संस्कार -

    यह संस्कार जन्म से चौथे माह में किया जाता है इस संस्कार में बच्चे को पहली बार घर से बाहर निकाला जाता है। यह संस्कार 16 संस्कारों में से 6वाँ संस्कार है। इस संस्कार को चौथे महीने में इसलिए किया जाता है क्योंकि चौथे महीने तक मे शिशु की इन्द्रियाँ धूप, शीत, वायु इत्यादि सहने हेतु शशक्त हो जाती है। इस संस्कार में सूर्य देव , चंद्र देव इत्यादि का पूजन किया जाता है पंचतत्वों के अधिष्ठाता देवों से शिशु पर कृपा दृष्टि बनाये रखने हेतु प्रार्थना किया जाता है, क्योंकि पंचतत्वों से शिशु का शरीर निर्मित होता है। सूर्यदेव, चंद्रदेव के दर्शन कराना इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य है। इस संस्कार को करने से शिशु की आयु में वृद्धि तथा स्वास्थ्य लाभ होता है, शिशु पर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश के अधिष्ठाता देवों अर्थात पृथ्वी माता, वरुण देव, अग्नि देव, पवन देव, तथा आकाश के अधिष्ठाता देव का कृपा होता है।

    शिव शिव शिव...

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