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Mahavidhyaayein Kya hoti Hain? Konsi mahavidhyaayein sabse pramukh Hain?

Mahavidhyaayein

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  • Ratnesh Kumar Sahu

    दस महाविद्याओं के नाम हैं -
    महाकाली माता ,तारा माता, त्रिपुर सुंदरी माता , भुवनेश्वरी माता , छिन्नमस्ता माता , षोडषी माता , धूमावती माता , बगलामुखी माता, मातंगी माता और कमला माता।

    ये माँ दुर्गा की ही शक्तियां है जो अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाली हैं । साधक जन इनसे अनेकों सिद्धियां प्राप्त करते हैं
    । इनका साधक सभी दुखों और भय से मुक्त हो दुर्गा माँ की भक्ति प्राप्त करता है।

    1. महाकाली माता - महाकाली माता अपने साधकों को अत्यंत शक्तिशाली बनाती हैं। इनके भक्तों को शत्रु इत्यादि से कोई भय नही होता। यह कज्जल पर्वत के समान शव पर आरूढ़ हो मुंडमाला धारण किए हुए तथा एकहाथ में खड्ग और दूसरे हाथ में त्रिशूल तथा तीसरे हाथ में कटे हुए सिर को लेकर भक्तों को दर्शन देती हैं।

    महाकाली माता समस्त शत्रुओं का नाश करने वाली ,रक्तबीज का वध करने वाली तथा महिसासुर का संहार करने वाली हैं। शिव प्रिया चामुंडा माता की साक्षात स्वरूप है।

    2. तारा माता - तारा माता शत्रु नाशिनी हैं जिन्हें सौंदर्य और रूप ऐश्वर्य की देवी कहा जाता है। तारा माता के पूजन से आर्थिक उन्नति होता है। भोग , मोक्ष सबकुछ प्राप्त होता है।
    तारा माता के तीन स्वरूप - तारा, एकजटा और नील सरस्वती हैं।
    तारा माता का पूजन चैत्र महीने की नवमी तिथि को और शुक्ल पक्ष को किया जाता है। इस दिन माता के पूजन से सर्वसिद्धियाँ हस्तगत होते हैं सभी मनोकामनाएं पूर्ण होते हैं। तारा माता के पूजन से व्यापार इत्यादि में भी उन्नति होता है इनका साधक महा यशश्वी होता है।

    3. त्रिपुर सुन्दरी माता - माता त्रिपुर सुंदरी की साधना शांत और उग्र दोनों रूपों में किया जाता है।मसलन, सिद्धि भैरवी, रूद्र भैरवी, कामेश्वरी आदि भी माता के रूप हैं इस प्रकार माताके अनेकों रूप हैं। सौभाग्य और शारीरिक सुख , वशीकरण तथा आरोग्य सिद्धि इत्यादि के लिए माता की आराधना की जाती है।
    कमल पुष्पों से होम करने से धनागमन होता है। मनोवांछित वर या कन्या से विवाह होता है। मनवांछित सिद्धि तथा मनोभिलाषापूर्ति सहित दुख से रहित हो मनुष्य सर्वत्र पूज्यनीय होता है।

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