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What is 'Annprashan' ceremony?

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  • संदीप चटर्जी

    बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसमें पाचन क्षमता नहीं होती है, वो बन रही होती है, यानी वो अनाज खाकर पचा नहीं सकता, प्रकृति का नियम भी संयोग वाला, वो शिशु को दांत भी नहीं देती। जन्मजात शिशु सिर्फ दूध पी सकता है उसके उदर में दूध पचाने वाले इंजाइम दूध से सभी पोषक तत्त्व उपलब्ध करा देते हैं, फिर शिशु थोड़ा बड़ा होता है तो अब वो अन्न शाक ये पचाने में सक्षम हो पाता है, मानव के लिये यह अवधि छह माह की है, इस तरह शास्त्र सम्मत अवधि के बाद , शुभ मुहूर्त देखकर, शिशु को पहला बार उसके जीवन का पहला अन्न खिलाया जाता है, रीति रिवाज के अनुसार प्रायः ये उसके मामा खिलाते हैं। इसके बाद से थोड़ा थोड़ा अनाज का अभ्यास दिलाया जाता है, ताकि धीरे धीरे शिशु को अन्न का अभ्यास हो, उसके शरीर मे भी पाचन तंत्र धीरे धीरे विकसित होती है।
    इस संस्कार को सोलह संस्कार में गिना जाता है।
    इससे पहले निष्क्रमण संस्कार 4 माह के बाद, पहली बार शिशु को घर से बाहर निकाला जाता है, जिसका उत्तर इस कृष्ण कुटुम्ब एप्प में काफी अच्छे तरीके से दिया गया है, उससे लाभ और इससे लाभ लगभग एक जैसे हैं, तो आप उसे एक बार देख लें

  • Krishnadas Kundu

    The day when baby 1st time eat annya

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