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yotiprakash Srila

Why the custom of naming ceremony in Hindus?

नामकरण समारोह करने का इतिहास क्या है?

From where this custom started?

इस समारोह की शुरुआत कैसे हुई?

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  • Ratnesh Kumar Sahu

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    नामकरण एक पवित्र संस्कार है ।

    यह सतयुग से आरम्भ होता है क्योंकि हिन्दू धर्म मे सत्ययुग प्रथम युग है।

    प्रत्येक प्रलय तथा महाप्रलय के पश्चात सतयुग आता है इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि प्रत्येक कलियुग की समाप्ति के पश्चात सत्ययुग आता है। यह क्रिया अनंत काल से चला आ रहा है।

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    आयुर्वेदभिवृद्धिश्च सिद्धिर्व्यवहतेस्तथा।

    नामकर्मफलं त्वेतत् समुदृष्टं मनीषिभि:।।

    इसका अर्थ है कि नामकरण से जातक की आयु तथा जातक के तेज में वृद्धि होती है साथ ही अपने नाम, अपने आचरण, अपने कर्म से जातक ख्याति प्राप्त कर अपनी एक अलग पहचान कायम करता है।

    कब किया जाता है नामकरण संस्कार

    नामकरण संस्कार आम तौर पर जन्म के दस दिन बाद किया जाता है। दरअसल जातक के जन्म से सूतक प्रारंभ माना जाता है जिसकी अवधि वर्ण व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। पाराशर स्मृति के अनुसार ब्राह्मण वर्ण में सूतक दस दिन, क्षत्रियों में 12 दिन, वैश्य में 15 दिन तो शूद्र के लिये एक मास का माना गया है। वर्तमान में वर्ण व्यवस्था के अप्रासंगिक होने के कारण इसे सामान्यत: ग्यारहवें दिन किया जाता है। पारस्कर गृहयसूत्र कहता है – “दशम्यामुत्थाप्य पिता नाम करोति”। यानि दसवें दिन भी पिता द्वारा नामकरण किया जाता है। लेकिन इसके लिये यज्ञ का आयोजन कर सूतिका का शुद्धिकरण करवाया जाता है। नामकरण संस्कार 100वें दिन या एक वर्ष बीत जाने के पश्चात भी किया जाता है। गोभिल गृहयसूत्रकार लिखते भी हैं – “जननादृशरात्रे व्युष्टे शतरात्रे संवत्सरे वा नामधेयकरणम्”।

    कैसे किया जाता है नामकरण

    नामकरण संस्कार के दौरान बच्चे को शहद चटाया जाता है, इसके पश्चात आशीर्वचन करते हुए जातक को सूर्यदेव के दर्शन करवाये जाते हैं। सूर्य के दर्शन करवाने के पिछे मान्यता है कि बच्चा भी सूर्य की तरह तेजस्वी हो। धरती माता को भी नमन किया जाता है। सभी देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है। इसके पश्चात शिशु का नाम लेकर उपस्थित जनों द्वारा उसकी लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य व उसके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। नामकरण किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य द्वारा ही करवाया जाता है क्योंकि जातक का जन्म जिस नक्षत्र में होता है उसी नक्षत्र के अक्षर से जातक का  नाम रखा जाता है। नामकरण के दौरान जातक  के जातिनाम, वंश, गौत्र आदि का भी ध्यान रखा जाता है। वहीं नाम की सार्थकता भी विशेष ध्यान रखा जाता है। नामकरण के दौरान जातक के दो नाम रखे जाते हैं। एक प्रचलित नाम होता है जो सबको बताया जाता है वहीं एक गुप्त नाम भी जातक का रखा जाता है जिसकी जानकारी केवल माता-पिता को होती है। मान्यता है कि इससे जातक मारण, उच्चाटन, मोहन आदि तंत्र-मंत्र, टोने-टोटकों से बचा रहता है, जातक का अहित चाहने वालों द्वारा किये गये इस तरह के अभिचार कर्म असफल रहते हैं।

    तो नामकरण संस्कार बहुत ही अच्छा संस्कार है आप भी अपने बच्चे का कोई सुंदर व सार्थक सा नाम रखें। ऐसा नाम कदापि न रखें जिसके कारण बालक को आगे चलकर अपने नाम के कारण किसी हीन भावना का शिकार होना पड़े।