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एक ही गोत्र में विवाह वर्जित क्यों माना जाता है?

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  • Yauvani Rabinder

    विवाह में *गोत्र* का प्रचलन आज भी है। इसका लक्ष्य होता है की एक ही गोत्र में विवाह नहीं होना चाहिए। विवाह सिर्फ दुसरे गोत्र में ही होना चाहिए। *सगोत्र* विवाह को शास्त्रों में तिरस्कारपूर्ण और धर्म के विरूद्ध माना गया है।

    *मनु स्मृति (3/5)* के अनुसार -
    *असपिण्डा च या मातुरसगोत्रा च या पितुः।
    सा प्रशस्ता द्विजातीनां दरकर्मणि मैथुने।।*

    इसका अर्थ है विवाह केवल उस कन्या से करना चाहिए जो आपकी माँ से कम से कम 6 पीडियों तक कोई सम्बन्ध न रखती हो और आपके पिता के गोत्र से ना हो।

  • Prateek Saxena

    डीएनए एक हो जाता है जो की अलग अलग होना चाहिये

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