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वानप्रस्थ का लक्ष्य क्या होता है?

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  • Amrusha Arati Niharika

    अपने जीवन के 50 वर्ष अपने परिवार के साथ बिताने के बाद *वानप्रस्थ* (ब्राह्मण के जीवन का तीसरा चरण) शुरू होता है। इस आयु में घर की सारी ज़िम्मेदारी बच्चों को सौंप दी जाती है और स्वयं देश और समाज की सेवा में लग जाना होता है। ये बाकी आश्रम से ज्यादा महत्वपूर्ण है। *वानप्रस्थ आश्रम* के विषय में *हारीत स्मृति (6/2)* में कहा गया है -
    *एवम वनाश्रमे तिष्ठां पातयश्चैव किल्बिषमा।
    चतुर्थमाश्रमं गच्छात सन्यासविधिना द्विजः।।*

    अर्थात, पारिवारिक जीवन के बाद मनुष्य को *वानप्रस्थ आश्रम* स्वीकार करना चाहिए। इसके प्रभाव से मनुष्य सभी मानसिक तनाव से मुक्त होता है और उसमे पवित्रता आती है। बाद में ये पवित्रता उसे *संन्यास आश्रम* में लाभकारी होती है।

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