Loading...

Jayantika Pasram

हमारे हिन्दू धर्म में इतने सारे भगवान् क्यों हैं?

.

|0|0
  • Puru Muthukaruppanशृद्धालु

    |0|0|0
    Download Image

    केवल देवी देवताओं में संपूर्ण रूप से दैवीय गुण, श्रद्धा और स्वभाव होता है। सामान्य तौर पर ये देव और देवियाँ सत्य, धर्म और प्रकृति के अनुसरण कर्ता होते हैं। परन्तु अगर उनके स्वाभाव में परिवर्तन आता है तो उसका मुख्य कारण है अपने वचनों में बाध्य होना या अपने कर्तव्यों में। इनके पास दैवीय शक्तियाँ होती हैं जिनसे ये अपने भक्तों को वरदान देते हैं।

    लोगों की मान्यता है कि कुल 33 करोड़ देवी देवता होते हैं।

    *बृहदारण्यक उपनिषद* के अनुसार मुनि याज्ञवल्क्य ने कहा था की *33 देवता* होते हैं। उनमे से -

    *1 प्रजापति*

    *1 देवराज इंद्र* - मेघों के देवता।

    *12 आदित्य* - वर्ष के 12 माह और उनके 12 सूर्य।

    *11 रूद्र* - 5 इन्द्रियां, 5 काम अंग और 1 आत्मा।

    *8 वासु* - अग्नि, पृथ्वी, वायु, आकाश, आदित्य, द्यौ, चन्द्रमा और ग्रह।

    प्रकृति के रूप में सम्पूर्ण जीवन ब्रह्मा है।

    *ऋग्वेद* के अनुसार -

    *इन्द्रम मित्रं वरुणमग्निमहुरथो दिव्यः सा सुपर्णो गरुत्मान।

    एकम सद्विप्रा बहुधा वदन्ति अग्निम यमम मातरीसवांमाहुः।।*

    अर्थात, बुद्धिमान मनुष्य *सत्स्वरूप परमेश्वर* (सत्य के रूप में ईश्वर) को अलग अलग नामों से पुकारते हैं। वे उन्हें *अग्नि*, *यम*, *मातृष्व*, *इंद्र*, *मित्र*, *वरुण*, *दिव्य*, *सुपर्ण*, *गरुत्मान* आदि नामों से पूजते हैं। असल में वही परम तत्त्व, वही असीमित, बंधनमुक्त, प्रमुख शक्ति ही अलग अलग रूपों में पूजी जाती है। इस तरह कहा जा सकता है की परम शक्ति एक है और उसके अलग अलग रूप हैं।

    मुख्य रूप से तीन ईश्वर स्वरुप हैं - *ब्रह्मा*, *विष्णु* और *महेश* और इनकी शक्तियाँ हैं *सरस्वती*, *लक्ष्मी* और *दुर्गा*।

  • Rohit Mishraशृद्धालु

    |0|0|0

    Bhagvan sirf ek hai sirf roop alag alag hai