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गंगा जैसी पवित्र नदियों में अस्ति विसर्जन क्यों किया जाता है?

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  • Ecchumati Punnoose

    गंगा जैसी पवित्र नदियों में अस्थि विसर्जन के पीछे मुख्य दो कारण हैं। *कूरम पुराण, अध्याय 35, श्लोक 31-34* -
    *यावद्षतीनी गंगायाम तिष्ठन्ति पुरुषस्य तू।
    तावद वर्ष सहस्राणि स्वर्गलोके महीयते।।

    तीर्थानां परमम् तीर्थ नदीनां परमा नदी।
    मोक्षदा सर्वभूतानां महापातकीनामपि।।

    सर्वत्र सुलभा गंगा त्रिषु स्थानेषु दुर्लभा।
    गंगाद्वारे प्रयागे च गंगासागरसंगमे।।

    सर्वेषामेव भूतानां पापोपहतचेतसाम।
    गतिमान्वेषमानानाम नास्ति गंगसमा गतिः।।*

    इसका अर्थ है की जितने वर्षों तक अस्थियाँ गंगा में रहेंगी उतने हज़ार वर्षों तक वो मनुष्य स्वर्ग में पूजा जाएगा। गंगा सभी धार्मिक स्थलों में से मुख्य धार्मिक स्थल है और सभी नदियों से श्रेष्ठ है। गंगा सभी प्राणियों के पाप धो देती है यहाँ तक कि बहुत पापियों के भी पाप धो देती है। गंगा सभी के लिए उपलब्ध है। हरिद्वार, प्रयाग और गंगा सागर तीन प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। जो सर्वोच्च की कामना रखते हैं उनके लिखे गंगा से बेहतर और कुछ नहीं है।

    *अन्तेष्ठी* के बाद अस्थि विसर्जन का एक वैज्ञानिक कारण भी है। गंगा हज़ारों मील तक बहती है और धरती को उपजाऊ बनाती है। अस्थियों में फॉस्फोरस होता है जो मिटटी को उपजाऊ बनाने में बहुत सहायक होता है। गंगा में अस्थियों के मिलने से पानी ज़मीन को उपजाऊ बनाए रखता है।

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