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  • क्या आज भी मिल सकता है अमृत?

    Akash Mittal

    अमर कौन नहीं होना चाहता? समुद्र मंथन में अमृत निकला। इसे प्राप्त करने के लिए देवताओं ने दानवों के साथ छल किया। देवता अमर हो गए। मतलब कि क्या समुद्र में ऐसा कुछ है कि उसमें से अमृत निकले? तो आज भी निकल सकता है?

    मर होने का मतलब है दुनिया पर राज करना। अनंतकाल तक जीना और जो मर्जी हो वह करना। महाभारत में 7 चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है। चिरंजीवी का मतलब अमर व्यक्ति। अमर का अर्थ, जो कभी मर नहीं सकते। ये 7 चिरंजीवी हैं- राजा बाली, परशुराम, विभीषण, हनुमानजी, वेदव्यास, अश्वत्थामा और कृपाचार्य। हालांकि कुछ विद्वान मानते हैं कि मार्कंडेय ऋषि भी चिरंजीवी हैं। लेकिन इनमें से किसी ने भी अमृत नहीं पिया था फिर भी ये अमर हो गए। अमर होने का रहस्य क्या है? इसे जानने के पहले हम जानते हैं कि आखिर अमृत मंथन क्यों हुआ था और किस-किस ने चखा था अमृत का स्वाद? इसके अलावा अंत में जानेंगे कि क्या अमृत आज भी प्राप्त किया जा सकता है...?

    क्या आज भी अमृत प्राप्त किया जा सकता है? उस काल में समुद्र मंथन करके जब अमृत निकाला गया था तो क्या इस काल में समुद्र मंथन करने की कोई तकनीक है? और क्या आज भी मंथन करके अमृत निकाला जा सकता है? जल में ऐसे क्या तत्व हैं जिससे कि अमृत निकल सकता है? शोधानुसार पता चला कि गंगा के जल में ऐसे गुण हैं ‍जिससे कि उसका जल कभी सड़ता नहीं। ऐसा जल पीना अमृत के समान है।

    बहती नदी का जल अमृत समान : समुंदर का जल पीने लायक नहीं होता। नदी का जल ही पीने लायक होता है। कहते हैं ग्रह और नक्षत्रों की विशेष स्थिति में धरती की नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है जिसका सेवन करके व्यक्ति पापमुक्त और युवा हो सकता है। हालांकि आजकल सभी नदियों का जल प्रदूषित कर दिया गया है। उनकी प्राकृतिकता को नष्ट कर दिया गया है। कुंभ वाले स्थान पर अब जल रोककर कुंभ की रस्म अदा की जाती है।

    संजीवनी बूटी की कथा भी अमरता से जुड़ी है। कहते हैं कि संजीवनी विद्या असुरों के गुरु शुक्राचार्य के पास थी। युद्ध में जब दैत्य मारे जाते थे तो वे उनको संजीवनी बूटी देकर फिर से जिंदा कर देते थे। आज भी यह बूटी ढूंढी जा सकती है? देवताओं ने इस विद्या के रहस्य को जानने के लिए उन्होंने कच को शुक्राचार्य का शिष्य बनने के लिए भेजा।

    अब कच असुरों के गुरु शुक्राचार्य के आश्रम में रहकर संजीवनी विद्या सीखने लगा। मगर जल्दी ही असुर आश्रमवासियों को यह जानकारी प्राप्त हो गई और उन सबने मिलकर कच का वध करके उसके शरीर के टुकड़े वन में ही विचरते एक भेड़िए को खिला दिए। शुक्राचार्य की बेटी देवयानी कच का बहुत ध्यान रखती थी। जब उसे इसका पता चला तो वह बहुत दुखी हुई। उसने पिता के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त की। शुक्राचार्य ने ध्यानस्थ होकर यह जान लिया था कि राक्षसों ने कच को मारकर उसके अंगों को भेड़ियों को खिला दिया है। शुक्राचार्य ने उसी संजीवनी विद्या का प्रयोग किया और कच जीवित हो उठा।

    क्या कर रहे हैं वैज्ञानिक : विज्ञान भी इसी दिशा में काम कर रहा है कि किस तरह व्यक्ति अमर हो जाए अर्थात कभी नहीं मरे। वैज्ञानिक आज भी प्रयोगशालाओं में ऐसे अनेक प्रयोगों में जुटे हैं जिनमें या तो मनुष्य की उम्र घटा देने की युक्ति है या फिर उसे अमरता के पास तक पहुंचा देने की जिद है। वैज्ञानिक अमरता के रहस्यों से पर्दा हटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के लिए कई तरह की दवाइयों और सर्जरी का विकास किया जा रहा है। अब इसमें योग और आयुर्वेद को भी महत्व दिया जाने लगा है। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के बारे में आयोजित एक व्यापक सर्वे में पाया गया कि उम्र बढ़ाने वाली 'गोली' को बनाना संभव है। रूस के साइबेरिया के जंगलों में एक औषधि पाई जाती है जिसे जिंगसिंग कहते हैं। चीन के लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करके देर तक युवा बने रहते हैं।

    'जर्नल नेचर' में प्रकाशित 'पजल, प्रॉमिस एंड क्योर ऑफ एजिंग' नामक रिव्यू में कहा गया है कि आने वाले दशकों में इंसान का जीवनकाल बढ़ा पाना लगभग संभव हो पाएगा। अखबार 'डेली टेलीग्राफ' के अनुसार एज रिसर्च पर बक इंस्टीट्यूट, कैलिफॉर्निया के डॉक्टर जूडिथ कैंपिसी ने बताया कि सिंपल ऑर्गनिज्म के बारे में मौजूदा नतीजों से इसमें कोई शक नहीं कि जीवनकाल को बढ़ाया-घटाया जा सकता है। पहले भी कई स्टडीज में पाया जा चुका है कि अगर बढ़ती उम्र के असर को उजागर करने वाले जिनेटिक प्रोसेस को बंद कर दिया जाए, तो इंसान हमेशा जवान बना रह सकता है। जर्नल सेल के जुलाई के अंक में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती उम्र का प्रभाव जिनेटिक प्लान का हिस्सा हो सकता है, शारीरिक गतिविधियों का नतीजा नहीं। खोज और रिसर्च जारी है...।

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