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  • भगवान मिलते क्यों नहीं?

    Shiv Das

    हम अपने माता पिता से बहुत प्रेम करते है अपने दोस्तों से भी प्रेम करते हैं यहाँ तक कि अपने पालतु पशुओं से भी प्रेम करते हैं किन्तु परमात्मा को केवल पुजते हैं जब दुख आये तो उन्हें याद करते और अन्य समय सिर्फ उनसे इच्छायें माँगते हैं परमात्मा सब जगह हैं किंतु दुःख में ही वे हमें याद आते हैं सुख में तो हम उन्हें जानते भी नही कि वे कौन हैं परमात्मा हमे 24 घंटे दिए हैं किन्तु हम उन्हें 10 मिनट भी शांति से याद नही करते उस 10 मिनट में भी सांसारिक बातें मन मे रहती है ।जब हम उन्हें भगवान मान मंदिर में ही स्थान देंगे तो वे कैसे हमारे होंगे उन्हें पाना है तो उनसे सच्चा प्रेम कीजिये जैसे अपने माता, पिता, बीवी ,बच्चों ,

    भाई, बहनों, मित्रों से करते हैं उन पर विश्वास कीजिये अपने सुख दुख उनके साथ बाँटिये तब परमात्मा जरुर मिलेंगे ध्रुव, प्रह्लाद,सुदामा,हनुमान,नंदी जी ये सभी उनसे प्रेम करते हैं केवल उनकी पूजा मात्र नही करते आप भी उनसे प्रेम कीजिये ।(परमात्मा अर्थात जिनमे आपकी श्रद्धा हो)परमात्मा को विधि या सांसारिक वस्तु जो आप उन्हें अर्पण करते हैं प्रिय नही है उन्हें तो बस आपका प्रेम और विश्वास ही प्रिय है वे अर्पण किये वस्तुओं को नहीं देने वाले के प्रेम को देखते हैं ।शिव शिव शिव

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