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  • नाम महिमा

    हनुमान स्वामी राम राम जपते हैं, पिता शिव भी राम राम जपते हैं, राम भरत भरत जपते हैं,भरत भी राम राम जपते हैं, सुदामा कृष्ण कृष्ण पुकारते हैं, प्रह्लाद हरि हरि भजते हैं, तुलसी दास जी राम राम कहते हैं, शिव महापुराण में लिखा है कि संसार मे इतने पाप नही जो शिव नाम न काट सके, ये नाम का ही बल है जो प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप न मार सके जिनसे त्रिलोक डरता था,ये नाम का ही बल है जो हनुमान जी को स्वयं राम न मार सके जब राम हनुमान में युद्ध हुआ,नाम भजन से तुलसीदास जी ने एक मृतक को जीवित कर दिया,राम नाम लिखा पत्थर तैर गया क्योंकि उनमे राम नाम थे ,राम के छोड़े पत्थर पानी मे डूब गए क्योंकि पत्थर को राम और राम नाम दोनो ने छोड़ दिया,हनुमान शिव के ग्यारहवें अवतार सूर्य देव के शिष्य महावीर केसरी जी के पुत्र हैं किन्तु वे भी नाम जप करते हैं नाम पर भरोसा करते हैं,नारद जी ब्रह्मा के पुत्र है देवों में महाऋषि हैं फिर भी नारायण नारायण जपते हैं ।वास्तव में जितनी महिमा नाम की है वो माता सरस्वती भी वर्णन नहीं कर सकती न ही सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी वर्णन कर सकते हैं।राम नाम जितने को तारी और तार रही है उतना तो राम भी नही तार पाए क्योंकि राम तो वैकुंठ चले गए कृष्ण भी चले गए। परमात्मा ने अपनी सारी शक्ति नाम मे ही समाहित कर दी वे शरीर धारण किये लीला कर चले गए किन्तु नाम रूप में सबको तार रहे हैं और आगे भी मुक्त करते रहेंगे वे बड़े भाग्यशाली होते हैं जिन्हें परमात्मा नाम जपने हेतु प्रेरित करते हैं।जब भरत एक बार प्यार से राम पुकारते तो पत्थर भी पिघल जाया करता है,नाम जापकर्ता का विष्णु पुत्र ब्रह्मा भी कुछ नही बिगाड़ सकते ,नाम आप जितना प्यार और विश्वाश से जपते हैं उतना ही वो सिद्ध होता है अर्थात लाभ देता है एक समय नित्य अभ्यास से ऐसा भी आता है जब प्रत्येक साँस में नाम उच्चारण होता है स्वप्न में भी नाम उच्चारण होता है और मृत्यु के समय भी ।यह परमात्मा का आत्मा (हम )पर असीम कृपा है कि अंत समय हम जो या जिन्हें याद करते हैं उन्हें ही प्राप्त होते हैं किंतु जीवन भर आप जिनका ज्यादा चिन्तन किये (धन ,पत्नी,बच्चे,सम्मान इत्यादि )वहीं अंत समय भी याद आता है और हम संसार मे जीवन चक्र हेतु ही फंसे रह जाते हैं हमें सदैव नाम जप द्वारा परमात्मा को याद करना चाहिए जिससे वे अंत समय भी हमे याद आयें।जय श्री राम शिव शिव शिव

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