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  • कृष्णवाणी

    कोई उन्हें पवित्र तीर्थ स्थलों में देखते हैं,तो कोई मंदिरों में,कोई उन्हें मनुष्यों में देखते हैं, तो कोई कहते हैं कि परमात्मा वैकुण्ठ,गोलोक, शिवलोक में हैं ।किन्तु किनके बातों पर विश्वास किया जाए ? आइये जानते हैं कृष्ण क्या कहते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता कृष्ण वाणी है ये किसी संत या देव की लेखनी नहीं।गीता के अनुसार वे सब जगह हैं चाहे वो मनुष्य हो ,पशु - पक्षी हो, पेड़ - पौधे हो या फिर कोई जड़ प्रकृति ही क्यों न हो ।संसार मे कुछ ऐसा नहीं जिनमे उनका वास नहीं वे दशम अध्याय में अपनी विभूतियों (रूपों)का वर्णन करते हैं और एकादश अध्याय में अपने विश्वरुप के दर्शन भी देते हैं। इसलिए हमें सदैव ये ध्यान रखना चाहिए कि शिव सर्वत्र हैं इससे हमारे मन मे अन्यों के प्रति जो गुस्सा ,द्वेष, और दयाहिनता जैसे दुर्भाव होते हैं उनका नाश होता है।। कृष्ण कहते हैं जो सबको परमात्मरूपी देखता है वो साधक (भक्त)अत्यंत श्रेष्ठ हैं।। हिरण्यकश्यप जी के पुछने पर प्रह्लाद ने परमात्मा को खम्भे में बताया और वे उनमे से प्रकट भी हुए।। प्रहलाद सर्वत्र हरिदर्शी भक्त हैं उनकी श्रेष्ठता आप सभी जानते ही हैं।. आपको एक कथा और सुनाता हूँ ये कथा रामसुखदास जी द्वारा साधक संजीवनी में लिखी है एक भक्त पुरुष कृष्ण का भजन कर रहे थे, वहाँ एक प्रेत उन्हें डराने के लिए प्रकट हुए किन्तु सर्वत्र भगवददर्शी भक्त ने उन्हें कृष्ण रूप ही जाना और दण्डवत प्रणाम करने लगे यह देख उसी छड़ वहाँ कृष्ण उन प्रेत शरीर से प्रकट हो गए और प्रेत को सद्गति भी मिल गयी ।
    हमे भी सर्वत्र परमात्मा हैं इसी दृष्टि से संसार को देखना चाहिए उनके दर्शन शायद हम किसी कारणवश न कर पाये किन्तु एक नेक इंसान जरूर बन जाएंगे ।शिव शिव शिव

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