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  • गरीब से ब्रम्हापुत्र बने ये बालक

    शिव दास

    बहुत पुरानी बात है जब एक गाँव मे एक माता रहती थीं उनका एक ही नन्हा सा बेटा था।वह माता दिनभर दूसरों के घरों में जाकर काम करती थीं और अपने बच्चे तथा अपना पेट पालती थीं।गाँव के अन्य बच्चे उस बालक को बहुत परेशान करते थे वो बेचारा अपनी माता के साथ कभी कभी काम पर जाया करता था और वहाँ बैठे बैठे सब देखता रहता था।

    एक दिन वो माता बच्चे को लेकर काम करने एक घर गयीं उस घर के मालिक का स्वभाव भक्तिमय था उनके यहाँ साधु संत आया करते थे और ज्ञान तथा हरिलीला की चर्चा करते थे,बालक भी उस घर में गया उनकी माता सारे काम करने लगीं और वो बैठे बैठे संतों के चर्चे सुनने लगा जब वे संत भोजन कर लेते तो वो बच्चा उनसे पूछकर उनका बचा हुआ जूठा भोजन खा लिया करता था ।ऐसे कई दिन बीते और संत समाज उस घर से कहीं और जाने की तैयारी करने लगे यह देखकर बच्चे ने उनसे कहा कि मैं भी आपके साथ चलूँगा इस पर सन्त बोले नहीं बेटा तुम्हारी माता का तुम्हारे सिवा कोई नहीं तुम उनकी सेवा करो।

    इस पर वो रोने लगा और जाने की जिद करने लगा संतों को उन पर दया आ गयी और वे बोले बेटा जब भी तुम्हारी माता की सेवा से तुम मुक्त हो जाओ हमारे पास आ जाना हम तुम्हे अपना लेंगे।

    सन्त संगत और सन्त जुठन ने बच्चे के हृदय में हरी भक्ति उत्पन्न कर दी वो माता की सेवा करने लगा और नारायण नाम जप से हरि को दिनभर स्मरण करने लगा, इस नाम का उपदेश संत उन पर दया के कारण किये थे।कुछ समय बाद एक दिन बेचारे की माता का देह किसी कारण शांत हो गया और बच्चा रोने लगा गाँव वालों की सहायता से उनका दशकर्म इत्यादि कर वो गली गली भटकने लगा।बच्चे उन्हें पत्थर इत्यादि मार उन्हें परेशान करते थे जब बच्चे का गाँव मे रहना मुश्किल हो गया तो वह जंगल की ओर भाग गया और वहाँ कंद मूल फल खाकर हरि भजन दिनरात करने लगा ।वह नारायण नाम मे पूरी तरह खो गया जिससे प्रभावित हो स्वयं श्रीहरि जी उन्हें दर्शन दिए और उनका कल्याण कर अंतर्ध्यान हो गए।समय बीतता गया और समय आने पर वह भक्ति करते हुए वृद्धावस्था में मृत्यु को प्राप्त हुआ। वही बालक अगले जन्म में ब्रम्हा जी के पुत्र हुए ये ज्ञान की देवी माता सरस्वती जी के पुत्र हैं जिनके सामने देव मनुष्य असुर सभी सिर झुकाते हैं इनका सम्मान करते हैं ।

    श्रीहरि को अत्यंत प्रिय यह बालक अन्य कोई नहीं स्वयं सरस्वती नंदन महर्षि नारद जी हैं जो आज भी विवाह इत्यादि सांसारिक बंधन से दूर नारायण नारायण भज रहे हैं ।जय नारद जी जय नारायण जय शिव ।शिव शिव शिव

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