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  • सर्वधर्मान परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वाम सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:।।

    शिव दास

    सभी धर्मों (कर्तव्य कर्मों)को छोड़कर एक मात्र मेरी शरण में आ जाओ मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा तुम शोक मत करो। परमात्मा में पूर्णरूप से समर्पित होना सभी पापों से मुक्ति देता है और परमात्म प्राप्ति में सहायक होता है।जय श्री कृष्ण

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