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  • एक दिन के लिये बनीं शिव पत्नी

    शिव दास

    यह कथा शिव महापुराण में आती है, एक माता थीं वह वेश्या थीं यह कार्य उनके पूर्वज किया करते थे वो नहीं किन्तु उस घर की होने के कारण वो भी यहीं कहलाती थीं ,वो शिव की बड़ी भक्तिन थीं।एक बार की बात है शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हो उनके घर में वेश बदलकर परीक्षा लेने आये ।माता अतिथि जानकर उनकी सेवा करने लगीं अचानक उनकी दृष्टि वेषधारी शिव के अमूल्य अँगूठी पर पड़ी माता को उनको पाने की इच्छा हुई वे शिव से अँगूठी माँगने लगी इस पर शिव बोले - इसके मूल्य रूप में आप क्या देंगी?तब माता ने कहा- मेरे पास आपको देने के लिए कुछ नहीं है किन्तु मैं आपकी एक दिन की पत्नी जरूर बन सकती हूँ।शिव जी मान गये और माता वायु सूर्य इत्यादि को साक्षी मानकर शिव जी को अपना पती स्वीकार कर लीं।शिव उन्हें अँगूठी दे दिए,रात्रि होने पर दोनों सोने जाने लगे तब शिव जी ने उन्हें एक शिवलिंग दिए और कहा ये मेरे ईष्ट हैं मैं इनकी नित्य आराधना करता हूं, तुम इसे मंदिर में रख आओ इसके बाद दोनों सो गए।

    देर रात होने पर शिव की लीला से पूरे घर में आग लग गयी।माता यह सब देख डर गयीं और उठकर आग बुझाने की कोशिश करने लगीं वो सारे गायों बैलों इत्यादि की रस्सी खोलने लगीं शिव माया रच शांति से सो रहे थे, उस घर में एक बंदर और एक कुत्ता था जो माता के पालतू थे माता शिव भजन गातीं और वे नाचते थे इस प्रकार उनका जीवन यापन होता था,माता उनके भी रस्सी को खोल आजाद कर दीं किन्तु शिवलिंग के विषय मे भूल गयीं।

    शिव नींद से जागे और सब तरफ आग लगा देख मंदिर की तरफ भागे वहाँ शिवलिंग को भष्म हुआ देख रोने लगे जोर जोर से चिल्लाने लगे माता उनको समझाने लगीं किन्तु बिना शिवलिंग के मेरा जीना व्यर्थ है कहकर स्वयं भी आग में कूद पड़े माता रोने लगीं उन्हें पति कि अमानत न बचा पाने का बहुँत दुख हुआ। वे सोचने लगीं की मैंने वायु अग्नि इत्यादि को साक्षी मानकर उन्हें पति माना और मेरे कारण उनकी मृत्यु हो गयी ।उन्होंने भी अग्नि में भष्म होने का निश्चय कर लिया और अपने परिवारजनों( चाचा मामा इत्यादि)को अपने घर संपत्ति इत्यादि दान कर सती होने की तैयारी करने लगीं उनके परिवार के समझाने पर भी वो न मानीं और चिता तैयार होने पर उनमें बैठ गयीं और चिता में आग लगा दिया गया।

    जैसे ही माता के शरीर को आग झुलसाने लगा शिव शंकर प्रकट हुए।वे माता को अपनी सारी लीला बताकर उन्हें जीवित अवस्था में ही शिवलोक चलने को कहा तब माता उनसे निवेदन करने लगीं की उनके परिवार को भी शिवलोक ले जायें भोले शिव उनके दयालुता से बहुँत प्रसन्न हुए।इस प्रकार माता अपने साथ साथ अपने समस्त कुटुम्बियों को भी तार गयीं।हर हर महादेव जय शिवहरि जय माँ जय लक्ष्मी माता...शिव शिव शिव

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