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  • राम को भेंट

    राम को शिव बहुँत प्रिय हैं और शिव को राम। राम और शिव के विषय में कहें तो राम शिव जी के परम भक्त हैं वे समुद्र किनारे रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना भी किये । तुलसीदास जी रचित रामचरितमानस में राम कहते हैं कि शिवद्रोही मुझे स्वप्न में भी प्रिय नहीं लग सकते।

    वहीं यदि हम शिव की बात करें तो वे प्रत्येक साँस में राम ही कहते हैं। माँ सती (पार्वती माँ का पहला जन्म) द्वारा राम परीक्षा हेतु जब माता सीता का रूप धारण किया गया तो शिव माँ का त्याग ही कर बैठे क्योंकि सती माँ उनकी पत्नी हैं और माता सीता उनकी माता समान, कोई माता का रूप धारण करें तो उन्हें पत्नी की दृष्टि से कैसे देखा जाये।

    रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं जिनके अर्थ भी विचित्र हैं।इनके दो अर्थ हैं रामेश्वर अर्थात राम जिनके ईश्वर हैं तथा रामेश्वर अर्थात जो राम के ईश्वर हैं।
    जब भी राम ( हरि )कहीं अवतार लेते हैं तो उनके बालरूप के दर्शन करने शिव अवश्य आते हैं , वे रामावतार तथा कृष्णावतार दोनो में आये। हरि का तात्पर्य हरने वाला होता है अर्थात जो कष्ट,पाप इत्यादि का हरण करें (मिटायें, दूर करें) वही हरि हैं।हम हरि विष्णु नाम हैं ऐसा जानते हैं किंतु आपको जानकर आश्चर्य होगा कि शिव का एक नाम हरि भी है किंतु हम उनका हर(हरने वाले) नाम ही जानते हैं।

    विष्णु जी और शंकर जी में ये तीन संबंध हैं -
    1. राम-शिव मित्र हैं,
    2. हरि, हर के भक्त तथा हर,हरि के स्वामी हैं,
    3. शम्भू,नारायण के भक्त तथा नारायण , शंकर के स्वामी हैं।
    जब विष्णु जी राम रूप में संसार मे अवतरित होने वाले थे उस समय शिव अपना हनुमान रूप भेंट रूप में राम को समर्पित किये। हनुमान शिव के अत्यंत प्रसिद्ध रूप हैं, ये सूर्य देव के शिष्य होने के कारण महाज्ञानी,वानर रूप में होने के कारण चंचल, पवन पुत्र होने के कारण अत्यंत तीव्र गति वाले, शिवावतार होने के कारण कालों के भी काल हैं इनसे स्वयं शनि भी भयभीत रहते हैं इनके सच्चे भक्तों पर शनि देव कुदृष्टि कभी नहीं डालते। हनुमान जी के भक्तों पर शिव - राम दोनों की कृपा सदैव बनी रहती है। ये अष्ट सिद्धि नव निधि के स्वामी हैं, इन्हें बुद्धि का स्वामी भी कहा जाता है, ये अजर(सदैव निरोगी) - अमर(मृत्यु रहित) हैं, इनके बल की कोई सीमा नहीं ये शिव के ऐसे रूप हैं जो शिव के बाद सर्वाधिक पूजे जाते हैं तथा राम के ऐसे सेवक हैं जिनके गुण गाते राम भी नहीं थकते।
    ये शिव द्वारा राम को किये गये अमूल्य भेंट हैं जिनके पास बल,बुद्धि, ज्ञान,सुंदरता,पूज्यनीयता सब कुछ हैं फिर भी ये भक्ति के पीछे भागते हैं राम नाम के रसिक हैं ।।
    भक्ति सुख या सद्गति पाने का साधन मात्र नहीं है भक्ति तो अपने आप में आनन्द के अथाह समुद्र हैं ।। जय श्रीराम जय हनुमान जी शिव । शिव शिव शिव

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