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  • अंतकाल

    Deven rathore

    एक सुनार का दृष्टांत हैं एक सुनार बीमारी के कारण शैया में पड़ा था ।कई महीनों से बाजार भी नही जा सका था।

    सो उसे सोना और सोने के भाव का विचार आता रहता था अंतकाल आया बुख़ार बढ़ता जा रहा था डॉक्टर को बुलाया गया डॉक्टर ने आकर बुख़ार चैक किया और कहा बुख़ार एक सौ पाँच बुख़ार डिग्री था।

    सुनार को लगा कि उसको किसी ने सोने का भाव बताया । वह अपने बेटे को कहने लगा कि ,बेच दे ,बेच दे।

    हमनें अस्सी के भाव मे लिए था। अब एक सौ पाँच हुआ है तो बेच दे।

    ऐसा बोलतें- बोलतें वो मर गया सुनार ने सारा जीवन सोना खरीदने ओर बेचने और सोने के विचार मे गुजरा । सो अंतकाल मे भी उसे सोने का ही विचार आता रहा।

    धन सम्पति की ही चिन्ता करने वाले को अंतिम समय पर भी रुपयों पैसे ही याद आते हैं धन कमाना कोई पाप नही है।

    किंतु उसे कमाते हुए भगवान को भुला

    देना पाप हैं।

    अंतकाल में जो मेरा स्मरण करता हुआ देहत्याग करता हैं।वह मुझे पाता है।

    अंतकाल का अर्थ...??

    अंतिम समय परन्तु प्रत्येक क्षण का अंतकाल। सो प्रत्येक क्षण ईश्वर का चिंतन, ध्यान ,स्मरण करना चाहिए।

    प्रत्येक क्षण को सुधारोंगे तो मृतक सुधरेगी।

    प्रत्येक क्षण को सुधारने का अर्थ है हर क्षण अपने प्यारे श्याम सुंदर को अपनी दृष्टि में रखना। लोग सोचते है कि सारा जीवन काम धंधा करेंगे

    ,उल्टा सीधा काम करके धन कमायेंगे और अंतकाल में भगवान का नाम लेकर संसार पार कर लेंगे। यह ग़लत विचार हैं।

    हमेशा जिस भाव का चिंतन करोंगे अंतकाल में भी उसी का स्मरण रहेगा।

    शुकदेव जी ने भी कहा हैं कि हे राजन !

    इंसान की आयु इसी तरह समाप्त हो रही है निद्रा और विलास में राते गुजर रहे है।

    धन-प्रप्ति के प्रयत्न में तथा कुटुंब के परिपालन में दिन गुजरते जाते है।

    इसलिए शुकदेवजी ने कहा---

    अंतकाल में वात पीत और कफ से त्रिदोष होता हैं मृत्यु की भयंकर वेदना होती हैं।

    जन्म- मृत्यु के दुखों का विचार करोंगे तो पाप नही होगा।

    सो मृत्यु से डरो। और उसका स्मरण रखो मृत्यु का स्वागत की तैयारी रखो।ओर भजन कीर्तन के लिये अनुकूल समय की प्रतीक्षा ना करो कोई भी क्षण भजन करों जिससे हमें अपने श्याम सुंदर की छवि का हर क्षण स्मरण रहे

    जय हो प्यारे श्यामाश्यामजू .... 🙏🏼🙌🏻

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