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  • ईश्वर और भक्त

    🍀🌹🍀🌹🍀राधे राधे 🍀🌹🍀🌹🍀

    एक गांव में एक मंदिर था ।गांव के लोग उस मंदिर में आते जाते थे ।उस गांव का 70 वर्षीय पुजारी सत्वगुणी था ,ईश्वर का बहुत बड़ा भक्त था । वह इस तरह जी रहा था ताकि सेवा सेवक की सेवा करें अथार्त वह सेवा करते हुए स्व पर ही रहता था और इस तरह वह मंदिर में होने वाली हर परिस्थिति को साक्षी भाव से देखता था ।वह मंदिर मे आने वाले लोगों का , उनकी चाहतो और प्रार्थनाओं का साक्षी था ।
    एक बार उस गांव में भयंकर सूखा पड़ा ।लोगों के पास न खाने के लिए अन्न था और न पीने के लिए पानी ।गांव वाले बेहद गरीब थे ,उस पर यह विपदा आ पड़ी थी । सुखे के कारण उन्हें भुखमरी के साथ कई बीमारियों का सामना भी करना पड़ रहा था ।
    गांव के लोग इस त्रासदी से परेशान हो गए ।इस दौरान पुजारी ने देखा कि अब मंदिर में लोग पहले से अधिक आने लगे हैं ,विपदा से मुक्ति के लिए प्रार्थनाएं करने लगे हैं ।प्रार्थना करते हुए लोगों की आँखों से आँसू बह रहे थे ।यहाँ तक कि वे हर रविवार को सामूहिक प्रार्थना भी करने लगें फिर भी उनके कष्ट जस के तस थे ।पुजारी साक्षी हो कर सब देख रहे थे ।
    पुजारी को ईश्वर की इस कठोरता पर आश्चर्य हो रहा था ।वह सोचने लगा, क्या कारण है जो इतनी. प्रार्थना के बावजूद भी ईश्वर गांव वासियों की पुकार नहीं सुन रहे है ? गांव के लोगों की हालत देख कर उसका मन करुणा से भर उठा ।करुणा भरे हृदय से उसने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा, हे ईश्वर, मैंने आज तक आपसे कुछ नहीं मांगा मगर आज इन गांव वासियों के लिए आपसे कुछ मांगना चाहता हूं।कृपया आप इनकी सहायता करें ।इनके कष्ट दूर करके इनकी खुशीयाँ लौटा दे ।रात को यह प्रार्थना करके वह सो गया ।
    उसी रात ईश्वर ने पुजारी को सपने में दर्शन दिए और कहा, तुम्हारी प्रार्थना कबूल हुई हैं ।यह सुनकर पुजारी बहुत खुश हुआ ।
    ईश्वर ने कहा, इसका कारण यह है कि गांव वाले केवल दुःख में प्रार्थना करते हैं ।जबकि तुम सुख और दुःख दोनों में मुझे याद करते हो ।इसलिए तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार हुई । गांव के लोग तो दुःख में प्रार्थना करते हैं, मंदिर में आकर साक्षी ( गवाही ) देते है कि गांव में ऐसा हो रहा है---- पानी नहीं है ,फसल नहीं है ,। सुख मे प्रार्थना की बात छोड़ो ,मंदिर में आकर गवाही देते भी नहीं है इसलिए तुम्हारी प्रार्थना कबूल हुई ।सुबह जब पुजारी की आँख खुल गई तो उसने देखा कि बारिश हो रही हैं ।गांव वासी बहुत खुश हैं नाच रहे हैं ।गाँववासियों के सारे कष्ट दूर हो गए उनका जीवन फिर से सामान्य होने लगा ।पूजारी साक्षी हो कर.यह दृश्य देख रहा था ।
    दुःख में इंसान को ईश्वर की याद आती हैं ।ईश्वर के सामने वह अपने दुखों का वर्णन विस्तार से और.बार बार करता है परंतु जैसे ही दुःख दूर हो जाता हैं वह ईश्वर को भूल.जाता हैं ।सुग मे ईश्वर के सामने आ कर गवाही देना भी भूल.जाता हैं । जरा सोचे कि सुख मे भी हम ईश्वर को साक्षी देगें तो क्या होगा ।इस कहानी में आपके लिए यही इशारा हैं कि आपके द्वारा यदि इस तरह की कोई भूल.हो रही हैं तो सजग हो जाएं ।
    इसी बीच पुजारी ने देखा कि जैसे ही दुःख दूर हुए मंदिर में लोगों का आना कम हो गया कुछ समय बाद.तो गांव वासियों ने रोज.मंदिर आना भी बंद कर दिया कभी कभार ही कोई मंदिर आता जाता था ।जो सामूहिक प्रार्थना हो रही थी वो भी बंद हो गई ।पूजारी ने गांव में जाकर लोगों से पूछा आप लोग मंदिर क्यों नहीं आते. इसका क्या कारण है तब लोगों ने अलग अलग कारण दिये ,दरअसल हम आने ही वाले थे फलां फलां. काम मे उलक्ष गया इत्यादि काम इतना बढ गया कि मंदिर आ नहीं पा रहा हूं ।जब भी आते जाते गांव वाले दिखाई देते तो पुजारी जी यही सवाल करते कि मंदिर क्यों नहीं आते गांव वाले कुछ न कुछ कारण बता देते और कहते मैं आने की पूरी कोशिशे करुंगा ।
    पुजारी को यह जानकर दुःख हुआ कि अधिकां,श लोग मंदिर तभी आते है जब उनकी कोई कामना होती हैं ।या कोई कष्ट मे होते है । इच्छा पूर्ण होने पर वे ईश्वर को भूल.जाते है ।
    🍀🌹🍀🌹🍀राधे राधे 🍀🌹🍀🌹🍀

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