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  • _____ की कसम है आप इसे 5 लोगों को फॉरवर्ड करो - ये क्या हो गया है समाज को?

    Akash Mittal

    हरे कृष्णा !

    आज कुछ बहुत ज़रूरी बात थी जो करनी थी। अक्सर मुझे कुछ ऐसे सन्देश मिलते हैं जिनका कोई अर्थ नहीं होता और वो बहुत तेज़ी से फैल रहे होते हैं। जी मैं बात कर रहा हूँ उन संदेशों की जिनमें लिखा होता है कि "आपको ___ की कसम है आप इसे 5 लोगों को फॉरवर्ड करो".

    कसम का अर्थ क्या होता है ? यही कि जिसकी कसम दी जा रही है उसका अहित हो जायेगा अगर आपने बात नहीं मानी तो। अक्सर हमारी माँ हमें कसम देती हैं जब उन्हें कोई बात मनवानी होती है। और हमें वो बात माननी ही पड़ती है। ना चाहते हुए भी। यहाँ तक की जब मेरी माँ कहती हैं कि बृहस्पतिवार को बाल नहीं कटवाने और मैं पूछता हूँ क्यों? तो उत्तर देने के वजाये (जो कि उनके पास होता ही नहीं) वो कसम देती हैं, "तुझे मेरी कसम है गया तो". अब जो बाल कटवाने निकले थे वही खींचते हुए अंदर आ जाते हैं। क्यों? क्योंकि माँ का अहित हो जाए वो बर्दाश ही नहीं।

    पर क्या इस कलयुग में कसम दे देने से कुछ भी होगा? आपको लगता है? पर हम डरते हैं कि माँ का अहित न हो बस। इसलिए ठीक है मान लिया। पर कसम से क्रोध आता है फिर वो चाहे कोई भी दे। अगर माँ देती है तो माँ पर भी क्रोध आता है पर वो कसम माँ की ही प्रॉपर्टी है तो कर भी क्या सकते हैं। पर माँ की कसम कोई और दे देगा तो हो सकता है कि अपशब्दों के साथ मुँह चल जाए और हानि पहुँचाने के मकसद से हाथ पैर। परन्तु अर्थ कुछ भी नहीं है।

    यहाँ तक तो ठीक है पर भगवान की कसम का क्या अर्थ है? हम कसम नहीं मानेंगे तो भगवान का अहित होगा? या फिर डर इस बात का है कि भगवान की कसम नहीं मानी तो कहीं भगवान हमारा अहित ना कर दें? सत्य तो आपके हृदय में है कि भगवान से डरते हैं या प्रेम करते हैं। में भगवान से नहीं डरता। में डरता हूँ जब कोई चींटी मेरे पैरों के नीचे आकर मर जाती है। में डरता हूँ जब किसी बच्चे को गुब्बारे बेचते हुए देखता हूँ। मैं डरता हूँ जब कोई किसी कुत्ते को पत्थर मार देता है। मैं डरता हूँ जब किसी के साथ भेद भाव का ख्याल आता है। पर भगवान से नहीं डरता। शायद मैं गलत हूँ। शायद भगवन मेरा अनिष्ट कर दें। पर मित्रों वो भगवान् है, उसे हम करुणा सागर बोलते हैं, उसे हम पूजते हैं और वो हमारे ऊपर राज नहीं करता। वो हमारा सहारा है, हमारा मित्र है, हमारा शरीर के अंत के बाद का भी साथी है। और एक बात सोचिए कि यदि कोई आपकी कसम ना माने तो क्या आप उसे दंड दोगे ? नहीं ना, तो जब आप इतने उदार है तो ईश्वर तो उदारता का सागर है।

    भगवान अनिष्ट नहीं करता। हमारे कर्म हमारा अनिष्ट करते हैं। हम मनुष्य इतने अच्छे नहीं हैं जितना हम अपने को समझते हैं। अरे मैंने ऐसे बहुत से काफी पढ़े लिखे लोग देखें हैं जो भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार चिल्लाते हैं और सरकारी नौकरी लगी भी नहीं होती है उससे पहले बोलने लग जाते हैं कि अब तो ऊपरी कमाई भी शुरू हो जायेगी। तो हम कहाँ पर हैं ? एक मुखौटा पहने हुए हैं और उम्मीद करते हैं कि भगवान हमारा भला करेगा। क्यों करेगा? नहीं करेगा। गीता में जो कुछ कहा गया है वो बिलकुल सत्य है। बिलकुल सत्य।

    मैं उम्र में बहुत छोटा हूँ। अपने से बड़ों को ज्ञान जैसा देना तो दुस्साहस है। परन्तु अगर मेरी बात ठीक लगती है तो जो भी कसम आदि के मैसेज भेजे उसे मेरा ये मैसेज फॉरवर्ड कर दीजियेगा। शायद एक दिन इस तरह के संदेशों का आदान प्रदान बंद हो जाए।

    आपका सच्चा साथी

    आकाश मित्तल

    कृष्णा कुटुंब मोबाइल ऐप्प

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