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  • देव या परमात्मा एलियन नहीं हैं। जानें मानव शरीर,देव शरीर और परमात्मा के शरीर में क्या है अंतर ।

    Shiv Das

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    आज हम बात करेंगे शरीर के विषय में । जैसा की हम सभी जानते हैं कि हम शरीर नहीं अपितु यह शरीर हमारा वस्त्र मात्र है,यह वो साधन है जिसके कारण हम सुख - दुख भोगते हैं तथा कर्म करते हैं।

    मानव शरीर पंच तत्वों से निर्मित है इसे आप भौतिक शरीर भी कह सकते हैं। कहा जाता है कि मानव शरीर प्राप्ति अत्यंत पुण्य कर्मों का कारण है।

    देव शरीर अत्यन्त उच्च कोटि का होता है इन्हें हम देख भी नहीं सकते,देख तो हम प्रेत शरीर को भी नहीं सकते क्योंकि प्रेत शरीर में पृथ्वी तत्व होता ही नहीं जिसके कारण हम उन्हें न छू सकते हैं न देख । देवताओं का न सिर्फ शरीर दिव्य होता है अपितु उनका भोजन , वस्त्र यहाँ तक कि उनका लोक भी दिव्य होता है यही कारण है कि उनके पृथ्वी में आने पर न हम उन्हें देख - सुन पाते हैं और न ही कभी अंतरिक्ष में उनके लोक को ही जान सकते हैं।

    कई वैज्ञानिक ये दावा करते हैं कि कृष्ण,शिव , इंद्र,सूर्य इत्यादि देव नहीं एलियन हैं किंतु यह पूर्ण रूप से गलत है। हमारे शरीर की तरह परग्रहियों का भी शरीर होता है देव शरीर इन परग्रहियों से भी श्रेष्ठ है क्योंकि एलियन दिखते हैं पर देव तो दिख भी नहीं सकते।फिर परमात्मा का शरीर तो देवों से भी अत्यन्त श्रेष्ठ होता है।

    आमतौर पर ऐसा दिखाया जाता है कि देव और शिव आदि में कोई भेद (अंतर) ही नहीं है किंतु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि देवता भी परमात्मा के दर्शन हेतु सदैव लालायित रहते हैं।

    ब्रह्मा जी का कार्य रचना करना है वे मानव ,पशु,पक्षियों यहाँ तक कि देव शरीर की भी रचना करते हैं किंतु कृष्ण,राम,शिव इनके शरीर के रचयिता स्वयं ब्रह्मा जी भी नहीं हैं।

    परमात्मा (शिव,कृष्ण) स्वयँ ही अपने शरीर को रचते हैं या यूँ कहूँ की वे स्वयं ही शरीर बनते हैं।जी हाँ, जैसे हम आत्मा हैं माता के गर्भ में केवल यह शरीर बनता है जिसमें हमारा प्रवेश होता है अर्थात हम और यह शरीर अलग हैं ऐसे परमात्मा के साँथ बिल्कुल नहीं है वे ही आत्मा और वे ही स्वयं के शरीर हैं।

    यही कारण है कि जब भी श्री हरि बालरूप में गंधर्व,मनुष्य,यक्ष या किसी भी लोक में जन्म लेते हैं ( शरीर धारण करते हैं ) तो उनके दर्शन करने देवताओं सहित स्वयं रचयिता ब्रह्मा तथा शंकर जी भी आते हैं।

    इसलिए पर्व - पर्व में देव पूजन अवश्य करें उनका पूजन न करना उनका अनादर हो सकता है किंतु यदि सच्ची भक्ति करनी है तो शिव - हरि जी की ही करें जय श्री कृष्ण ।शिव शिव शिव...

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