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  • 🌞भगवान तिरुपति बालाजी🌹

    भगवान तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं।
    तिरुपति बालाजी का मंदिर आंद्र-प्रदेश के तिरुमाला पहाड़ों मे है, इस मंदिर मे बहुत बड़े और अमीर लोग आते हैं और वे अपनी इच्छा अनुसार दान भी करते हैं, इस कारण से आज ये मंदिर अमीर मंदिर मे गिना जाता हैं, आपको बता दे की भगवान तिरुपति बालाजी को वेंकटेश्वर, श्रीनिवास और गोविंदा के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के बहुत ज्यादा विख्यात होने का कारण यहाँ के अद्भुत चमत्कार हैं इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएँ जुड़ी हैं जो आप माने या ना माने लेकिन वहाँ के भक्त इन्हें बहुत मानते हैं, इस रहस्य से संबंधित बातें जिस सबसे आज तक आप अन्भिग्य थे, तो जानिये आज हम आपको तिरुपति बालाजी मंदिर के ऐसे रहस्य बताएँगे जिन्हे जानकर आप दंग रह जाएंगे।

    (1)*कहा जाता है की इस मंदिर मे वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे हुए बाल असली है और ये कभी भी उलझते नही हैं और हमेशा मुलायम रहतें है, लोगों का मानना है की ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ पे खुद भगवान वीराजते हैं।

    (2)*कहा जाता है कि जब 18 शताब्दी में मंदिर की दिवार पर ही कुछ लोगों को फांसी दी गयी थी तबसे खुद वेंकटेश्वर स्वामी जी मंदिर में प्रकट होते रहते हैं, इस मंदिर को पूरे 12 वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था, क्योंकि उस वक्त वहाँ के राजा ने कुल१२ लोगो को मौत की सज़ा दिया और उन्हें मंदिर के गेट पे लटका दिया।

    (3) *अगर आप मंदिर में जाते हैं तो भगवान बालाजी की मूर्ति पे अगर कान लगा के सुना जाए तो आप आश्चर्य-चकित हो जाएँगे क्योंकि जब आप कान लगाएँगे तो आपको समुद्र की आवाज़ सुनाई देगी और इसी कारण वश हमेशा बालाजी की मूर्ति हमेशा ही नम रहती हैं, आपको यहाँ एक अजब सी शान्ति प्रतीत होगी।

    (4) *मंदिर मे मुख्य द्वार के दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे मे कहा जाता है की इस छड़ी से बालाजी के बाल रूप मे पिटाई की गई थी जिस कारण-वश उनकी ठोड़ी पे चोट लग गई तबसे आज तक उनके ठोड़ी पे हमेशा से चंदन का लेप लगाया जाता है, ताकि उनका घाव भर जाए।

    (5)*बालाजी के इस मंदिर मे एक दिया हमेशा जलता रहता है, इसमें ना कभी तेल डाला जाता ना ही घी, सोचने और आश्चर्य करने वाली बात ये है की कोई भी नहीं जानता है कि यह दीया कब और किसने जलाया था, क्योंकि ये दीया वर्षों से जलता ही आ रहा है।

    (6)*अगर आप दर्शन करने के लिए बालाजी के मंदिर मे जाएँगे तो आश्चर्य मे पड़ जाएँगे क्योंकि जब आप बालाजी के मूर्ति को गर्भ-गृह से देखेंगे तो भगवान की मूर्ति मंदिर के गर्भ-गृह के मध्य मे स्थित पाएंगे, लेकिन जब आप इसे बाहर आकर देखेंगे तो पाएँगे की मूर्ति मंदिर के दाईं और स्थित है।

    (7) *भगवान बालाजी की प्रतिमा पर एक खास तरह का पचाई कपूर लगाया जाता है, अगर इसे किसी भी पत्थर पर चढ़ाया जाता हैं तो वो कुछ समय के बाद ही चटक जाता है किन्तु भगवान की प्रतिमा को कुछ नहीं होता है।

    (8)*मंदिर में मूर्ति पर जीतने भी फूल-पत्ती या तुलसी के पत्ते चढ़ाते हैं वो सबके सब भक्तों को ना देकर पीछे उपस्थित एक जलकुंड है उन्हें वही पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है, क्योंकि पुष्प को देखना और रखना अच्छा नही माना जाता है।

    (9)*प्रत्येक गुरुवार के दिन तिरुपति बालाजी को पूर्ण रूप से पूरा का पूरा चंदन का लेप लगाया जाता है और जब उसे हटाया जाता है तब वहाँ खुद-ब-खुद ही माता लक्ष्मी की प्रतिमा उभर आती हैं ये आज तक नही पता चल पाया हैं ऐसा क्यों होता हैं और भगवान तिरुपति बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।

    (10)*मंदिर से २३ किलोमीटर दूर एक गाँव है, उस गाँव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहाँ पर लोग नियम से रहते हैं। वहीँ से लाए गये फूल भगवान को चढाए जाते है और वहीँ की ही वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि।

    (11) *तिरुपति मंदिर में भक्तों द्वारा बहुत दान किया जाता है। मान्यतानुसार इस मंदिर में दान की परम्परा विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय के समय से चली आ रही है। राजा कृष्णदेवराय इस मंदिर में हीरे, सोना-चाँदी आदि का बहुत दान करते थे। नदी के तट पर विष्णु ने श्रीनिवास भगवान के रुप में जन्म लिया था।

    पुराणों के अनुसार वेंकटम पर्वत को विष्णु के वाहन गरुड़ द्वारा भूमि पर लाया गया था भविष्यपुराणानुसार विष्णु जब अपने शयनकक्ष में सो रहे थे तो महर्षि भृगु ने उनकी छाती पर जोर से प्रहार किया था। इस पर माता लक्ष्मी जी को बहुत दुख हुआ और उनके दुखी हो कर वहां से चले जाने पर भगवान विष्णु को बहुत दु:ख हुआ और वे तिरुमाला पर्वत पर निवास करने लगे। तिरुपति का सम्पूर्ण क्षेत्र भगवान विष्णु को वैकुंठ धाम के बाद सबसे ज्यादा प्रिय है।

    हरे कृष्णा

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