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  • 🌞जन्म से पूर्व जीवन (विज्ञान)(1)🐚

    Vishal Vaishnav

    १. जन्म से पहले का जीवन-एक परिचय

    क्या मेरे पास यही जीवन है ? जन्म से पूर्व हम कहां होते हैं ? मृत्यु के उपरांत हम कहां जाते हैं ?

    लगभग हम सभी इन प्रश्‍नों से परिचित होंगे । कुछ समय पूर्व हमने मृत्यु के उपरांत क्या होता है, इस विषय पर एक लेख प्रकाशित किया था । आध्यात्मिक शोध के माध्यम से हम जन्म से पहले के जीवन का दो भागों में वर्णन करेंगे । ये दो भाग इस प्रकार हैं :

    भाग १. गर्भ में आने से पूर्वभाग

    २. गर्भ में आने के पश्चात

    इस लेख को दो भागों – गर्भ में आने से पूर्व व गर्भ में आने के पश्चात – में प्रकाशित करने का कारण यह है कि इससे हम इस बात पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे कि हम जीवन को परिणामों के साथ जीते हैं । कर्म का सिद्धांत हमारे पूरे जीवन में व्याप्त है । हम अपना वर्तमान जीवन जिस प्रकार जीते हैं, वह हमारे मृत्यु के पश्‍चात का जीवन और पुनर्जन्म की गुणवत्ता निश्चित करता है । अधिकांश लोग जन्म से पूर्व तथा मृत्यु के पश्‍चात के आध्यात्मिक जीवन में रुचि रखते हैं, बहुत ही कम लोग पृथ्वी पर अपने आध्यात्मिक जीवन की वास्तविकता में रुचि रखते हैं । जो लोग रुचि रखते हैं, उनका मृत्यु के पश्‍चात का जीवन और पुनर्जन्म अच्छा होगा और वे जन्म-मृत्यु के चक्र से छूट जाएंगे ।

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    २. जन्म लेने से पूर्व हम कहां होते हैं ?

    हमारी मृत्यु होने के पश्‍चात (हमारी विभिन्न सूक्ष्म देह) हमारे आध्यात्मिक स्तर एवं गुण-दोषों के अनुसार विभिन्न सूक्ष्म लोकों में जाती है । पृथ्वी पर जन्म लेने का अवसर मिलने से पूर्व हम इन लोकों में विभिन्न अवधि के लिए रहते हैं ।

    २.१ जन्म से पूर्व जीवन : स्वर्गलोक एवं उससे ऊपर के लोक

    आज के समय में प्रत्येक १०० लोगों में से केवल २ ही व्यक्ति उच्च लोक जैसे स्वर्गलोक, महर्लोक इत्यादि तक पहुचते हैं । इन लोकों में अधिकतर सुख व आनंद का अनुभव होता है ।

    शेष सभी भुवलोक अथवा पाताललोक में जाते हैं । यहां इन लोंकों में घोर दु:ख एवं अत्यधिक पीडा का अनुभव होता है ।

    २.२ जन्म से पूर्व जीवन : भुवर्लोक

    भुवर्लोक में अनुभव की जाने वाली पीडा सामान्यत: पृथ्वी (भूलोक) से बहुत अधिक होती है क्योंकि यहां कुछ विशेष क्रियमाण नहीं है । भुवलोक में, १०% सूक्ष्म शरीरों (आत्माओं) को उच्च लोक जैसे स्वर्गलोक, महर्लोक की सूक्ष्म शरीरों, आत्माओं से मार्गदर्शन मिलता है । ये वह जिज्ञासु आत्माएं हैं जिनमें आध्यात्मिक उन्नति की तीव्र लगन है । लगभग २% सूक्ष्म शरीर (आत्माएं) पूर्ण रूपसे प्रारब्ध के अधीन होती हैं और लगभग ८८% सूक्ष्म शरीरों (आत्माओं) पर भूतों (राक्षसों, पिशाचों, अनिष्ट शक्तियों) द्वारा आक्रमण होते हैं । ये सूक्ष्म शरीर (आत्माएं) पूरी तरह यह जानते हैं कि वे भूतों के नियंत्रण में हैं; परंतु उनसे बचने के लिए कुछ नहीं कर सकतीं । इसका कारण यह है कि उनके पास अपना कोई आध्यात्मिक बल नहीं होता ।

    २.३ जन्म से पूर्व जीवन : पाताल के लोक

    पाताल के विषय में इतना ही कह सकते हैं कि पृथ्वी पर अपने जीवनकाल में आने वाला सबसे कष्टपूर्ण समय भी पाताल की तुलना में अच्छा है । पाताल के विविध लोकों में सूक्ष्म शरीरों (आत्माओं) पर १००% नियंत्रण उच्च स्तर की अनिष्ट शक्तियों का होता है । जैसे-जैसे हम पाताल लोक के निचले लोकों में जाते हैं, कष्ट और पीडा बढती जाती है । पृथ्वी पर पुनर्जन्म के लिए पात्र होने से पहले हम ५०-४०० वर्ष नीचे के लोकों में रहते हैं । पाताल लोक में जाने के उपरांत पुनर्जन्म का अवसर मिलने में सहस्रों वर्ष लग सकते हैं ।

    २.४ सूक्ष्म लोकों में साधना

    निम्नांकित सारणी यह दर्शाती है कि वर्तमान समय में हमारी मृत्यु होने पर हमारी किन सूक्ष्म लोकों में जाने की संभावना है ।

    वर्तमान समय के अनुसार मृत्यु पश्‍चात ब्रह्मांड के विशिष्ट सूक्ष्मलोक में जाने वाली विश्व की संभावित जनसंख्या=>

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    इस ब्रह्मांड में निचले लोकों में (पाताल के विविध लोकों में) भोगी जाने वाली यातनाओं का अंत केवल साधना से ही संभव है । यद्यपि पाताल लोक अथवा ब्रह्मांड के निम्न लोकों में (जैसे भुवर्लोक व पाताल लोक) साधना कर पाना असंभव है । अत्यधिक कष्ट और भूतों के आक्रमण साधना के लिए वहां असंभव वातावरण का निर्मार्ण करते हैं और सूक्ष्म शरीर इस कठोर वातावरण में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करते हैं ।

    स्वर्गलोक में सूक्ष्म शरीरों को इतना सुख मिलता है कि वे उसी में फंसकर रह जाते हैं और कोई साधना ही नहीं करते । यद्यपि स्वर्ग में साधना करना संभव है, तब भी सुख के अनुभव के कारण भटक जाने से इसकी संभावना नाममात्र होती है ।

    महर्लोक से सत्यलोक तक के उच्च लोकों में साधना की जा सकती है और वास्तव में हो भी जाती है । इन लोकों के सूक्ष्म शरीरों (आत्माओं) को लेन-देन चुकाने अथवा साधना करने के लिए पृथ्वी (भूलोक) पर जन्म लेने की आवश्यकता नहीं होती ।

    पृथ्वी (भूलोक) पर जीवन का महत्त्व अधिक है; क्योंकि यहां निम्न लोकों की आत्माओं का जन्म साधना करने, लेन-देन चुकाने और जन्म-मृत्यु के चक्र से छूटने के लिए हो सकता है ।

    २.५  क्या हमें सूक्ष्म लोकों में अपना पूर्व जन्म याद रहता है ?

    साधरणत: सूक्ष्म शरीर (आत्मा) को पृथ्वी (भूलोक) पर हुए अपने पिछले जन्म की घटनाएं याद होती हैं । इससे पिछले जन्म इसे याद नहीं होते, जब तक उनके बारे में कुछ विशेष न हो । ऐसा सूक्ष्म शरीर (आत्मा) के पृथ्वी (भूलोक) पर पुनर्जन्म लेने तक होता है । पाताललोक अथवा भुवर्लोक में पिछले जन्म को जानने की बात को प्राथमिकता नहीं होती । साधारणतया ये सूक्ष्म शरीर दु:खों और भूतों से बचाव और अपनों से दूर होने की पीडा से ग्रस्त रहते हैं ।

    २.५.१ हमें इस जीवन में अपने पिछले जन्म क्यों याद नहीं रहते ?

    जैसे-जैसे हम संसार में व्यस्त होते जाते हैं हम सूक्ष्म लोकों और पृथ्वी पर अपने पिछले जन्मों को भूल जाते हैं । हमारी भौतिक इंद्रियां / पंचज्ञानेंद्रियां, छठी ज्ञानेंद्रिय को पूरी तरह से ढंक लेती हैं । यह हम पर ईश्वर की कृपा ही है कि उन्होंने वह व्यवस्था की है कि हम पिछले जन्मों के विषय में भूल जाते हैं । अन्यथा अपने इस जीवन के क्रियाकलापों को संभालते हुए पूर्वजन्म के संबन्धों का भी स्मरण रहना कितना कष्टप्रद होता । जैसे इस जन्म के पिता-पुत्र संभव है कि पिछले जन्म में पति-पत्नी हों अथवा वर्तमान जीवन की माता पूर्वजन्म में अपनी ही बेटी की मृत्यु के लिए उत्तरदायी हो इत्यादि ।

    ३. हम पृथ्वी पर जन्म क्यों लेते हैं ?

    पृथ्वी पर हमारा जन्म लेन-देन व कर्मों का हिसाब पूर्ण करने और साधना करने के लिए होता है । भुवर्लोक व पाताल के लोकों में लेन-देन समाप्त करने के लिए साधना करना लगभग असंभव होता है ।

    व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात पुन: पृथ्वी पर जन्म लेना उस व्यक्ति (या उसकी आत्मा) के हाथ में नहीं होता । पृथ्वी पर जन्म लेना दुर्लभ है । गर्भ में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक सूक्ष्म शरीर के साथ लाखों अन्य सूक्ष्म शरीर (आत्माएं) पृथ्वी पर सांसारिक जीवन का अनुभव लेने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं । परंतु केवल वही सूक्ष्म शरीर (आत्मा) जिसका गर्भ में प्रवेश करने का प्रारब्ध है, पृथ्वी पर जन्म लेता है ।

    ४. हमारा पुनर्जन्म कब, कहां और किसके यहां होगा यह निर्धारित करने वाले घटक क्या हैं ?

    दो मुख्य घटक जो पृथ्वी पर हमारा पुनर्जन्म निर्धारित करते हैं :

    1.क्या पृथ्वी पर हमारे लेन-देन चुकाने के लिए परिस्थिति अनुकूल है ?

    2..जन्म से पूर्व हम कौन से लोक में हैं ?

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