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  • विष्णु भगवान

    Gopal Goenka

    *भगवान विष्णु*

    *हिन्दू सनातन धर्म के अनुसार विष्णु 'परमेश्वर' के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं | भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं | संपूर्ण विश्व श्रीविष्णु की शक्ति से ही संचालित है | वे निर्गुण, निराकार तथा सगुण साकार सभी रूपों में व्याप्त हैं | ईश्वर के ताप के बाद जब जल की उत्पत्ति हुई तो सर्वप्रथम भगवान विष्णु का सगुण रूप प्रकट हुआ | विष्णु की सहचारिणी माता लक्ष्मी जी हैं | विष्णु की नाभी से ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई | आदित्य वर्ग के देवताओं में विष्णु श्रेष्ठ हैं | और भी कई विष्णु हैं* |

    *विष्णु जी का अर्थ- विष्णु के दो अर्थ है- पहला विश्व का अणु और दूसरा जो विश्व के कण-कण में व्याप्त है* |

    *विष्णु जी की लीला*

    *भगवान विष्णु के वैसे तो 24 अवतार है किंतु मुख्यत: 10 अवतार को मान्यता है | विष्णु ने मधु केटभ का वध किया था | सागर मंथन के दौरान उन्होंने ही मोहिनी का रूप धरा था | विष्णु द्वारा असुरेन्द्र जालन्धर की स्त्री वृन्दा का सतीत्व अपहरण किया गया था* |

    *विष्णु जी का स्वरूप*

    *क्षीर सागर में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु अपने चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए होते हैं | उनके शंख को 'पाञ्चजन्य' कहा जाता है | चक्र को 'सुदर्शन', गदा को 'कौमोदकी' और मणि को 'कौस्तुभ' कहते हैं | किरीट, कुण्डलों से विभूषित, वनमाला तथा कौस्तुभमणि को धारण करने वाले, कमल नेत्र वाले भगवान श्रीविष्णु देवी लक्ष्मी के साथ निवास करते हैं* *विष्णु जी के मंत्र*

    *पहला मंत्र- ॐ नमो नारायण* |

    *श्री मन नारायण नारायण हरि हरि* |

    *दूसरा मंत्र- ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर | भूरि घेदिन्द्र दित्ससि | ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन् | आ नो भजस्व राधसि* |

    *विष्णु जी का निवास*

    *क्षीर सागर में | विष्णु पुराण के अनुसार यह पृथ्वी सात द्वीपों में बंटी हुई है- जम्बूद्वीप, प्लक्षद्वीप, शाल्मलद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप और पुष्करद्वीप | ये सातों द्वीप चारों ओर से सात समुद्रों से घिरे हैं | ये सभी द्वीप एक के बाद एक दूसरे को घेरे हुए बने हैं, और इन्हें घेरे हुए सातों समुद्र हैं | दुग्ध का सागर या क्षीर सागर शाकद्वीप को घेरे हुए है | इस सागर को पुष्करद्वीप घेरे हुए है* |

    *भगवान विष्णु जी के नाम*

    *भगवान श्रीविष्णु ही नारायण कहे जाते हैं | वे ही श्रीहरि, गरुड़ध्वज, पीताम्बर, विष्वक्सेन, जनार्दन, उपेन्द्र, इन्द्रावरज, चक्रपाणि, चतुर्भुज, लक्ष्मीकांत, पद्मनाभ, मधुरिपु, त्रिविक्रम,शौरि, श्रीपति, पुरुषोत्तम, विश्वम्भर, कैटभजित, विधु, केशव, शालीग्राम आदि नामों से भी जाना जाता है* |

    *भगवान विष्णु जी के अवतार*

    शास्त्रों में भगवान विष्णु के 24 अवतार बताए हैं, लेकिन प्रमुख दस अवतार माने जाते हैं- मत्स्य, कच्छप, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बु‍द्ध और कल्कि*|

    24 अवतारों का क्रम निम्न है-- 1.आदि पुरूषु, 2.चार सनतकुमार, 3.वराह, 4.नारद, 5.नर-नारायण, 6.कपिल, 7दत्तात्रेय, 8.याज्ञ, 9.ऋषभ, 10.पृथु, 11.मतस्य, 12.कच्छप, 13.धनवंतरी, 14.मोहिनी, 15.नृसिंह, 16.हयग्रीव, 17.वामन, 18.परशुराम, 19.व्यास, 20.राम, 21.बलराम, 22.कृष्ण, 23.बुद्ध और 24.कल्कि* |

    *भगवान विष्णु जी के 24 अवतारों को समझिए*

    *वैष्णव संप्रदाय के उप संप्रदाय*

    *वैष्णव के बहुत से उप संप्रदाय है- जैसे बैरागी, दास, रामानंद, वल्लभ, निम्बार्क, माध्व, राधावल्लभ, सखी, गौड़ीय आदि | वैष्णव का मूलरूप आदित्य (वेदों के जन्मदाता चार ईशदूतों में से एक) की आराधना में मिलता है | भगवान विष्णु का वर्णन भी वेदों में मिलता है | पुराणों में विष्णु पुराण प्रमुख रूप से प्रसिद्ध है | विष्णु का निवास समुद्र के भीतर माना गया है* |

    *वैष्णव ग्रंथ*

    *ऋग्वेद में वैष्णव विचारधारा का उल्लेख मिलता है | ईश्वर संहिता, पाद्मतन्त, विष्णुसंहिता, शतपथ ब्राह्मण, ऐतरेय ब्राह्मण, महाभारत, रामायण, विष्णु पुराण आदि* |

    वैष्णव तीर्थ*

    बद्रीधाम, मथुरा, अयोध्या, तिरुपति बालाजी, श्रीनाथ, द्वारकाधीश* |

    वैष्णव संस्कार*

    1.वैष्णव मंदिर में विष्णु, राम और कृष्ण की मूर्तियाँ होती हैं | एकेश्‍वरवाद के प्रति कट्टर नहीं हैं*

    2.इसके संन्यासी सिर मुंडाकर चोटी रखते हैं* |

    3.इसके अनुयायी दशाकर्म के दौरान सिर मुंडाते वक्त चोटी रखते हैं* |

    4.ये सभी अनुष्ठान दिन में करते हैं* |5.यह सात्विक मंत्रों को महत्व देते हैं* |6.जनेऊ धारण कर पितांबरी वस्त्र पहनते हैं और हाथ में कमंडल तथा दंडी रखते हैं* |

    7.वैष्णव सूर्य पर आधारित व्रत उपवास करते हैं* |

    8.वैष्णवों में दाह संस्कार की रीति हैं* |

    09. यह चंदन का तिलक खड़ा लगाते है |

    *🚩🌹🙏🙌जय माँ आंदि शक्ति जय महाकाल 🙌🚩*

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