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  • 🌞व्रतश्री इंदिरा एकादशी और महात्मय {वैकुंठ प्राप्ति ,पितरों की मुक्ति,स्वर्ग प्राप्ति, यम कोप से मुक्ति,पाप

    ⭐हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है व उनके निमित्त व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से मनुष्य सब पापों से छूट जाता है और वैकुंठ को प्राप्त होता है व उसके पितरों को भी स्वर्ग में स्थान मिलता है।

    इस शुभ दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और इस व्रत को करने से कई प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं.

    ❄क्यों खास है यह एकादशी व्रत  

    पूरे साल में कुल 24 एकादशी आती है इनमें एक एकादशी ऐसी है जो हर साल पितृपक्ष में आती है इस एकादशी का नाम है इंदिरा एकादशी। पितृपक्ष की एकादशी होने के कारण यह एकादशी पितरों की मुक्ति के लिए उत्तम मानी गई। इस एकादशी की महिमा का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है।इस पुराण में भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा है कि आश्विन मास की कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम इंदिरा एकादशी है। जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान हृषिकेश की पूजा करता है वह मृत्यु के बाद यमलोक जाने से बच जाता है।

    इतना ही नहीं जिनके पूर्वज यानी पितर किसी पाप के कारण यमलोक में जाकर यम की यातना सह रहे हैं उन्हें भी यम के कोप से मुक्ति मिल जाती है और स्वर्ग जाने का अधिकारी बन जाते है। पितृपक्ष में इस एकादशी के आने का उद्देश्य भी यही है कि जिनके पितर यम की यातना सह रहे हैं उन्हें मुक्ति मिल जाए।

    धर्म ग्रंथों के अनुसार यह व्रत करने से मनुष्य सब पापों से छूट जाता है और वैकुंठ को प्राप्त होता है व उसके पितरों को भी स्वर्ग में स्थान मिलता है।

    पितृपक्ष में मनाई जाने वाली इस एकादशी से पितरों को मुक्ति मिलती है और दूसरे लोक में उनकी आत्मा को सुकून मिलता है.

    क्या है इस व्रत का महत्व 

    पुराणों के अनुसार इन्दिरा एकादशी व्रत, साधक की मृत्यु के बाद भी प्रभावित करता है. इसके प्रभाव से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और इस व्रत के प्रभाव से उसे स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है. इस व्रत के प्रभाव से जातक के पितरों का दोष भी समाप्त होता है

    इसके बाद द्वादशी तिथि को सुबह होने पर भगवान का पूजन करके ब्राह्मणों को भोजन कराएं। भाई-बंधुओं, स्त्री और पुत्र सहित मौन होकर भोजन करें। इस प्रकार व्रत करने से पितरों को स्वर्ग में स्थान मिलता है।

    🔳इंदिरा एकादशी की व्रत कथा...

    सतयुग के समय महिष्मति नाम की नगरी में इंद्रसेन नाम का एक प्रतापी राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करते हुए रहता था. वह राजा पुत्र, पौत्र और धन आदि से संपन्न और भगवान विष्णु का परम भक्त था. एक दिन जब राजा अपनी सभा में बैठा था तो आकाश मार्ग से महर्षि नारद उतरकर उसकी सभा में आए. राजा उन्हें देखते ही हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और उनका पूजन किया.
    उन्होंने देवर्षि नारद से उनके आने का कारण पूछा. तब नारद मुनि ने कहा कि- हे राजन! आप मेरे वचनों को ध्यान से सुनो. मैं एक समय ब्रह्मलोक से यमलोक को गया, वहां श्रद्धापूर्वक यमराज से पूजित होकर मैंने धर्मशील और सत्यवान धर्मराज की प्रशंसा की. उसी यमराज की सभा में महान ज्ञानी और धर्मात्मा तुम्हारे पिता को एकादशी का व्रत भंग होने के कारण देखा. उन्होंने संदेशा दिया वह मैं तुम्हें कहता हूं. उन्होंने कहा कि पूर्व जन्म में कोई विघ्न हो जाने के कारण मैं यमराज के निकट रह रहा हूं.
    इसलिए हे पुत्र यदि तुम आश्विन कृष्ण इंदिरा एकादशी का व्रत मेरे निमित्त करो तो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है. नारदजी की बात सुनकर राजा ने अपने बांधवों तथा दासों सहित व्रत किया, जिसके पुण्य प्रभाव से राजा के पिता गरुड़ पर चढ़कर विष्णुलोक को गए. राजा इंद्रसेन भी एकादशी के व्रत के प्रभाव से निष्कंटक राज्य करके अंत में अपने पुत्र को सिंहासन पर बैठाकर स्वर्गलोक को गए.

    🔲क्या है इस व्रत की विधि 

    - पद्म पुराण के अनुसार एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से किया जाता है, जिसमें एक बार भोजन, ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है.

    - अगले दिन यानि एकादशी व्रत के दिन स्नानादि से पवित्र होकर व्रत संकल्प लेना चाहिए.
    {मैं आज संपूर्ण भोगों को त्याग कर निराहार (बिना कुछ खाए-पिए) एकादशी का व्रत करूंगा या करूंगी। मैं आपकी शरण में हूं, आप मेरी रक्षा कीजिए।}

    - पितरों का आशीष लेने के लिए विधि-पूर्वक श्राद्ध कर ब्राह्मण को भोजन व दक्षिणा देना चाहिए. 

    - धूप, फूल, मिठाई, फल आदि से भगवान विष्णु का पूजन करने का विधान है. पितरों के श्राद्ध से जो बच जाए, उसे गाय को दें तथा ध़ूप, दीप, गंध, पुष्प, नैवेद्य आदि सब सामग्री से ऋषिकेश भगवान का पूजन करें। रात में भगवान की प्रतिमा के निकट जागरण करें।

    - उसके बाद अगले दिन यानि द्वादशी तिथि को पुन: पूजन कर ब्राह्मणों को भोजन करवाकर, परिवार के साथ मौन होकर भोजन करना चाहिए.

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    🌺🌼🌹🌸🏵हरे कृष्णा🏵🌸🌹🌼🌺

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