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  • नवरात्री 2017 कहानी - देवी चंद्रघंटा

    चंद्रघंटा, दुर्गा का रौद्र रूप है। इनके शीश पर अर्ध चंद्र है और एक हाथ में घंटा है। माँ अपने भक्तों को बल, शक्ति और साहस का वरदान देती हैं। इनकी कृपा से पाप, दुःख, शारीरिक तकलीफें, मानसिक तनाव और भूत-प्रेत बाधाएं दूर होती हैं।

    चंद्रघंटा, देवी का तीसरा रूप है। अर्थात नवदुर्गा के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके आठ हाथ हैं जो त्रिशूल, गदा, तीर-कमान, तलवार, कमल, कमंडल और घंटा धारण किये हुए हैं। इनका एक हाथ अभयमुद्रा में रहता है अर्थात वे अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। उनके शीश पर अर्ध चंद्र है और माथे के बीच तीसरी आँख है। उनका वर्ण सोने के समान है। वे बाघ की सवारी करती हैं जो क्रोध में दहाड़ता है। ये वीरता दर्शाता है। चंद्रघंटा दानवों के नाश के लिए और अपने भक्तों को भय मुक्त करने के लिए इस रूप को धारण करती हैं। इनके घंटे से निकलती हुई भीषण ध्वनि हज़ारों राक्षसों को मृत्यु के समीप पहुंचा देती है।

    चंद्रघंटा की कहानी कुछ इस प्रकार है कि जब शिव पार्वती के तप से और उनकी पीड़ा से व्यथित हो कर उनसे विवाह करने को तैयार हो गए तो पार्वती के लिए प्रसन्नता और सुख का समय शुरू हो गया। उनकी सभी पीड़ाओं का अंत हुआ। शिव विवाह के लिए पार्वती जी को लेने राजा हिमावन के घर पहुंचे। उनके साथ देवता, दानव, भूत, प्रेत, अघोरी, पिशाच, सर्प, गण आदि आये। स्वयं शिव भस्म में लिपटे हुए थे। दृश्य साधारण मनुष्यों के लिए बहुत ही भयानक था। यह देख पार्वती जी की माँ, मैना देवी, बेहोश हो गयीं। अपने परिवार की भयपूर्ण स्थिति देख देवी पार्वती ने चंद्रघंटा का रूप लिया।

    चंद्रघंटा ने शिव जी को मनाया कि वो सुन्दर रूप धारण करें। शिव बोले कि वो तो अपने प्राकृतिक रूप में आएं हैं। पर चंद्रघंटा ने उन्हें कहा की वो अपने उस रूप में प्रकट हों जिस रूप को शृष्टि सुन्दर मानती है। चंद्रघंटा की वीर मुद्रा को देख कर शिव बहुत प्रसन्न हुए। ये रूप शिव को बहुत सुन्दर, वीर और मोहित करने वाला लगा। उनकी बात मानते हुए शिव ने राजकुमारों जैसा रूप धारण किया। वेशकीमती हीरे और जवाहरातों से सुसज्जित एक राजकुमार पार्वती से विवाह करने आया था। सभी भूत, प्रेत, गण, पिशाच अब सुन्दर दिखने लगे। यह देख पार्वती जी के परिवारजन मोहित हो गए।

    जहाँ एक ओर चंद्रघंटा का रूप रौद्र है वहीँ दूसरी ओर उनके भक्तों के लिए वो ममता से भरा हुआ है। माँ अपने पुत्रों को शांति, समृद्धि और वीरता से परिपूर्ण करती हैं। उनके सभी दुःखों को हर लेती हैं।

    || जय माँ चंद्रघंटा ||

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