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  • मेरा आज का अनुभव

    Rajrishi Nayar

    आज मुझे एक मित्र के पिता जी जो कि काफी गम्भीर हालत मे बीमार थे और हस्पताल मे भर्ती थे उनको देखने जाना पड़ा।जब मै उनके कमरे मे दाखिल हुआ तो उनको मुख पर आक्सीजन और नेबुलाईज़र लगा हुआ था।दोनो हाथों पर ग्लुकोज़ और पल्स पता करने की सुईयां और न जाने क्या क्या लगा हुआ था जिस अवस्था मे आम इंसान आराम से लेट नही सकता उस से भी बुरी हालत मे वह सब कुछ होते हुए भी कमर सीधी करके भजन अभ्यास की अवस्था मे बैठे हुए थे और जब मैने उनके पुत्र से हाल पूछा तो उसने बताया कि इनके फेफड़े मे पानी पड़ गया है, नब्ज़ ठीक नही चल रही निमोनिया और हार्ट मे सटंड डाला गया है।

    पर यह भजन के पक्के हैं। किसी भी हालत मे अपना नियम नही छोड़ते।

    यह देख कर मैं उस पुनीत आत्मा के सामने नत मस्तक हो गया.....मेरा कंठ भर आया और मन गद् गद् हो गया......मुझे अपने पर उस समय बड़ी शर्म आई जब जब मै अभ्यास से मन चुरा कर सो गया यां नाम जपने मे आलस करता रहा।

    गुरमुखो यह हम सब के लिए एक उदाहरण है कि एक गुरमुख का जीवन कैसा होना चाहिए।

    गुरमुख कथनी से नही करनी से पहचाने जाते हैं और कष्ट के समय गुरमुख और मनमुख की परख होती है।

    श्री सद्गुरूदेव जी हम सब पर ऐसी कृपा करें जिस से सुख हो यां दुख कभी नाम अभ्यास या नियम पालन मे हमसे कोई त्रुटि न रह जाए और स्वास स्वास नाम का अभ्यास होता रहे।🙏🙏🙏

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