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  • कृष्णा कुटुंब क्या है और उसका ध्येय क्या है ?

    Akash Mittal

    देखने में तो कृष्णा कुटुंब एक मोबाइल ऐप्प लगता है परन्तु इसका ध्येय बहुत बड़ा है। इसे परिवर्तन की सोच के साथ बनाया गया है। अगर आपके पास इसे पढ़ने का वक़्त नहीं है तो कृष्णा कुटुंब आपके लिए नहीं है।

    चलिए आज आपको बताते हैं कि कृष्णा कुटुंब क्यों बनाया गया है।

    हमने बहुत से लोगों को देखा और समझा। भारत अपनी धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है परन्तु अधिकांश लोग धार्मिक होते ही नहीं। अगर आप कहते हैं की आप धार्मिक हैं तो पुनः विचार कर लें क्योंकि स्वयं से बोला झूठ आपको अन्धकार में रखता है और आप उससे उबर नहीं पाते हैं। सिर्फ रोज़ सुबह आरतियां गाने से आप धार्मिक नहीं हो जाते। आपको ईश्वर से प्रेम करना होता है। हर रोज़ उससे मांगना नहीं होता है कि हे भगवान हमारा आज का काम बन जाए, या हे भगवान हमें धन लाभ हो या हमें खुश रखना। आप केवल याचक बन कर रह गए हैं। अगर आपके पास कोई रोज़ केवल मांगने के लिए आये तो क्या आप उससे प्रेम करेंगे? आप समझ जायेंगे कि ये तो सिर्फ मांगने आता है हमसे बाकी इसे कोई मतलब नहीं। दूसरा कारण है कि लोगों के अंदर ईश्वर का भय है। अगर मैंने व्हाट्सप्प पर मैसेज फॉरवर्ड नहीं किया तो ईश्वर कहीं दंड ना दे दें, अगर मैंने आज पूजा नहीं की तो ईश्वर नाराज़ ना हो जाएँ। ज़रा अपने आपको देखिये की कितने भय में जीवन जी रहे हैं आप। उससे भय है जो आपके पिता हैं, आपकी माता हैं, आपके मित्र हैं। आपको रोज़ आरतियां गाने की ज़रूरत नहीं है अगर आप गा केवल नियम के लिए रहे हैं तो। आपको सिर्फ उससे प्रेम करना है। आपके माता पिता किसी भी परिस्थिति में आपका बुरा नहीं चाहेंगे फिर वो तो आपके परमपिता हैं। उनसे किस बात का भय? असल में आपने कभी प्रेम किया ही नहीं उनसे इसलिए ह्रदय में इतनी दूरी है कि भय लगता है।

    मैंने ऐसे बहुत से लोग देखें हैं जो जब पढ़ रहे होते हैं तब रोज़ भगवन को याद करते हैं परन्तु जैसे ही नौकरी लगती है वो बोलने लग जाते हैं कि भाई हम ज्यादा धार्मिक नहीं हैं। हम तो विज्ञान के विद्यार्थी हैं। असल में उनके पास अब धन आने लगा है जिसकी उन्हें कामना थी और अब उन्हें ईश्वर की ज़रूरत महसूस नहीं होती। एक बार कोई मुसीबत आने दीजिये वो फिर ईश्वर के द्वार पर खड़े होंगे और विज्ञान के तोते उड़ चुके होंगे। परन्तु क्या आप ईश्वर को मुर्ख बना सकते हो? कभी नहीं।

    में भी विज्ञान का ही छात्र हूँ। और देश का बहुत अच्छा इंजीनियर जो कंप्यूटर का किसी भी तरह का प्रोडक्ट बना सकता है तो क्या आज मेरे पास हर सवाल का जवाब है? क्या में जानता हूँ की में असल में हूँ कौन और इस धरती पर क्या कर रहा हूँ और समय पूरे होने पर क्या होगा ? नहीं। विज्ञान ने मुझे इन सभी प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया।

    में ये नहीं कहता की आप रोज़ पूजा करें। पूजा की असल में कोई विधि नहीं होती। सबसे बड़ी पूजा है कि आप स्वयं से सत्य बोलें। पूजा है कि आप इस बात को समझें कि जो जानवर आपके आस पास रहते हैं उन्हें भी भूख लगती है और पीड़ा होती है। पूजा है कि जो बच्चा फुटपाथ पर गुब्बारे बेच रहा है वो सिर्फ इसलिए क्योंकि आपकी तरह उसे एक थोड़े संपन्न घर में जन्म नहीं मिला तो हमें उनके लिए भी कुछ सोचना चाहिए। पूजा है कि दोष देने से बेहतर अपना दिमाग खोलें और परेशानिओं को हल करने का प्रयास करें। केवल श्री कृष्ण की बातें सुनकर कुछ अच्छा नहीं होने वाला है उन्हें जीवन में लाना पड़ता है। पर क्या आपको श्री कृष्ण की सीख पता भी हैं? मुझे लगता है नहीं। क्योंकि अगर पता होती तो सबसे पहले आपका जीवन खुशहाल होता। श्री कृष्ण की एक बात जो शायद सभी को पता है - कर्म कर, फल की इच्छा मत कर। क्या आप इसे मानते हैं? नहीं। क्या में मानता हूँ? जी हाँ। मैं पांच वर्षों से समाज के लिए कुछ बड़ा बनाने का प्रयास कर रहा हूँ और बार बार हारता हूँ परन्तु मुझे कर्म करना है फल देना कृष्णा का काम है में क्यों चिंता करूँ? में पांच वर्षों से बिना धन की इच्छा के कार्य किये जा रहा हूँ, आप दो दिन नहीं कर पाएंगे। और विश्वास रखिये एक दिन कृष्णा मुझे मेरे कर्मों का फल भी देंगे और वो बहुत विशाल होगा। और अगर ना भी दें तब भी मुझे अपने हृदय में स्थान तो अवश्य ही देंगे।

    सोच एक बहुत बड़ा अध्याय लिखता है हमारे जीवन में। अगर सोच दूसरों को दोष देने की है तो हमारे द्वारा फैलाई हुई गन्दगी हमें कभी दिखेगी ही नहीं और सरकार हमेशा दोषी रहेगी। उस गन्दगी से बीमार हमारा परिवार होगा जो हमें कष्ट देगा परन्तु हम फिर भी सिर्फ दोष देंगे। अगर सोच सकारात्मक है तो परिवर्तन लाएंगे।

    हम सरकार को भ्रष्ट कहते हैं। और उचित कहते हैं। परन्तु सरकार के विभिन्न पदों पर बैठे लोग हम जैसे ही होते हैं कोई अलग नहीं। मैंने बहुत लोग देखें हैं जो भ्रष्टाचार का गाना गाते हैं और सरकारी नौकरी के लिए प्रयत्न कर रहे होते हैं और नौकरी अभी लगी भी नहीं होती है की ऊपरी कमाई का स्वप्न देखने लगते हैं। वो लोग हमारे जैसे ही होते हैं जो भ्रष्टाचार करते हैं। हम बोलते हैं कि भ्रष्टाचारियों को सजा होनी चाहिए और उनके खिलाफ कड़ा कानून होना चाहिए जिससे कोई भ्रष्टाचार करने का सहस ना करे तो क्या जब हमारे ऊपर कानून होगा, हमें बेड़ियों में रखा जायेगा तभी हम मर्यादाओं और ईमानदारी से जीवन जियेंगे? इसका तो अर्थ हुआ की ईमानदारी केवल हमारे ऊपर थोपी गयी है। हम ईमानदार नहीं होना चाहते वो तो कानून की वजह से होना पड़ता है। अगर ऐसा नहीं है तो सोचिये कि ये भ्रष्टाचार तो दशकों से फैला हुआ है तो नए लोग भी सरकारी महकमे में आये होंगे। इसका अर्थ हुआ की वो लोग भी भ्रष्टाचार कर ही रहे हैं। तो इसका अर्थ हुआ कि या तो केवल भ्रष्ट लोग ही सरकारी महकमे में पहुंचते हैं या पहुंचने के बाद भ्रष्ट हो जाते हैं। वो सभी लोग हमारे बीच के होते हैं जो पढ़ कर और कम्पटीशन से सरकारी नौकरी पाते हैं। जो पहले रिजर्वेशन चिल्लाते हैं उन्हें जब नौकरी मिलती है तो वो भी भ्रष्टाचार का हिस्सा होते हैं। पैसे से पेट नहीं भरता। नीचता, दोगलापन, अपने को श्रेष्ठ साबित करना, परिस्थितियों के अनुरूप सिर्फ अपने भले के लिए अपनी सोच बदलना हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। इसे आप झुठला नहीं सकते। जब बात हमारे स्वयं के हित की होती है तो सही नियम भी हमें गलत लगते हैं। अगर किसी अमीर और सुखी व्यक्ति के विरूद्ध कोई नियम निकलता है तो बहुत प्रसन्नता होती है हमें भले ही हमें कोई ज्ञान न हो कि वो नियम सही है या नहीं परन्तु हमें तो वो बिलकुल सही लगता है। अगर मैं दूकान चलाता हूँ और कर नहीं भरता और सरकार मेरे खिलाफ नियम निकालती है तो मेरे और मेरे परिवार के लिए सरकार राक्षसों की हो जाती है और बाकी लोगों को बहुत प्रसन्नता होती है कि ये बहुत अच्छा हुआ। इतना कमाता है कर नहीं भरता। अब जरूर फंसेगा। इसलिए नियम का सही या गलत होना केवल इस बात पर निर्भर करता है कि वो नियम हमारे विरूद्ध है या पक्ष में। अगर कोई मुझे चोरी करने से रोक रहा है तो वो गलत कर रहा है और मेरी नज़र में तो मैं चोर कभी था ही नहीं। मेरी नज़रों में मैं क्या हूँ वो महत्व नहीं रखता परन्तु सत्यता में मैं क्या हूँ वो महत्व रखता है। मैं हमेशा बोलता हूँ कि भय नहीं होना चाहिए परन्तु इस स्थिति में भय होना अनिवार्य है। आप केवल परिस्थिति में जी रहे हैं परन्तु जो भी कर्म कर रहे हैं उसका परिणाम तो अवश्य ही भुगतना होगा। भयभीत हो जाइये और सुधार कीजिये।

    अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या में ISKCON से जुड़ा हुआ हूँ? क्या मेरे साथ कोई बहुत बड़ी संस्था है? आखिर क्यों आपको किसी संस्था की ज़रूरत है अपने और अपने समाज के हित के लिए? क्या में अकेला समाज में परिवर्तन का कार्य शुरू नहीं कर सकता? क्या किसी संस्था से जुड़े होने पर ही लोग मेरी भावनाओं को समझेंगे? असल में लोग स्वयं को कमजोर समझते हैं। परन्तु विश्वास करें मैं कमजोर नहीं हूँ। मैं अपने इस कृष्णा कुटुंब के ध्येय पूर्ती के लिए आगे बढूंगा और जो लोग मेरी जैसी सोच रखते हैं वो मुझसे अवश्य जुड़ेंगे और संस्था भी बन जाएगी। जिन्हे बनी हुई संस्थाएं चाहिए वो हमारे साथ कार्य कर भी नहीं सकते।

    कृष्णा कुटुंब इसी सोच के बदलाव के लिए बनाया गया है। परिवर्तन इसका ध्येय है। जानवरों से झूठे प्रेम और केवल त्योहारों पर पूजने के आडम्बर को ख़त्म करना है। जिस प्रकार मनुष्यों में जाती और धर्म के आधार पर भेद भाव क्रूरता है उसी प्रकार जानवरों की नस्ल के आधार पर उनसे भेद भाव ठीक नहीं। एक गधा भी उसी प्रकार पीड़ा महसूस करता है जिस प्रकार एक गाय, भैंस, कुत्ता आदि। परन्तु हमारे समाज में गधे का कोई सम्मान नहीं। अपितु अगर कोई गधे के लिए कुछ चिंता प्रकट करता है तो आस पास के लोग हंसने लगते हैं। वो मुर्ख हैं जो ऐसा करते हैं क्योंकि उन्हें गधे के विषय में कुछ नहीं पता परन्तु वो ऐसा केवल इसलिए करते हैं क्योंकि बचपन से उन्होंने गधे को एक मुर्ख जानवर के रूप में पढ़ा है और अपने बड़ों से सुना है। उन्होंने कभी खुद का दिमाग इस्तेमाल करके ये नहीं सोचा कि आखिर इस जानवर में बुराई क्या है? क्यों हम इसका उपहास कर रहे हैं? पर दिमाग का आज तक इस्तेमाल नहीं किया तो अब क्या करेंगे। अगर सिर्फ भय की भाषा समझ आती है तो समझ लें की ये गधा महाकाली की सवारी है और महाकाली का क्रोध बरसता है तो क्षमा मांगने का अवसर भी नहीं मिलता।

    सोच में परिवर्तन पूरी श्रृष्टि में परिवर्तन ला सकती है। अगर कलयुग के बाद सतयुग आएगा तो वो केवल लोगों की सोच के परिवर्तन से आएगा। और उसकी शुरुआत इसी कृष्णा कुटुंब से होगी। क्या आप हमारे इस कुटुंब के साथ हैं? क्या आप सोच में परिवर्तन करना चाहते हैं? क्या दूसरों में बुराइयाँ देखना छोड़ कर खुद की बुराइयां ख़त्म करने का प्रयास करना चाहते हैं? अगर हाँ तो समाज में बदलाव बहुत जल्द आएगा।

    कृष्णा कुटुंब, मोबाइल ऐप्प के ज़रिये लोगों को धर्म और कर्म का ज्ञान देती है। इसमें अलग अलग तरह की सुविधाएं हैं। ये एक समुदाय बनाती है जिससे लोग जुड़कर एक दुसरे से वार्तालाप कर सकते हैं, तस्वीर साझा कर सकते हैं, फेसबुक की तरह पोस्ट डाल सकते हैं, सवाल पूछ सकते हैं और विभिन्न तरह की कहानियाँ पढ़ सकते हैं और डाल सकते हैं। आप इस पर सुन्दरकाण्ड, भगवत गीता, मंत्र, आरतियां, चालीसा, व्रत विधियां, त्यौहार इत्यादि की जानकारी ले सकते हैं। अपने प्रोफाइल फोटो पर विभिन्न त्योहारों का फ्रेम लगा सकते हैं जिससे आपका फोटो सज जायेगा।

    कुछ समय पश्चात हम एक बहुत बेहतरीन और अदभुत चीज़ का निर्माण करेंगे जो लोगों के जीवन में एक नया परिवर्तन लाएगा। ये होगा आभासी मंदिर दर्शन (virtual temple tour) इसकी मदद से आप भारत के सभी मंदिर अपने मोबाइल से घूम सकेंगे। आप पूर्ण रूप से मंदिरों में चल कर दर्शन कर पाएंगे। आप आस पास की दुकानों से पूजा सामग्री और प्रसाद ले पाएंगे। मंदिरों के आस पास के आकर्षण जैसे नदियां, बाजार आदि घूम पाएंगे। जो चीज़ें दूर होंगी उन तक पहुंचने के लिए रिक्शा ले पाएंगे। आप पवित्र नदियों में स्नान, मंदिरों में पूजा और बाकि भक्तों से मिलाप कर पाएंगे। बहुत सारी गतिविधियाँ कर सकेंगे जैसे मंदिर की घंटियां बजाना, आरती करना, कीर्तन करना इत्यादि। जो भी कार्य आप असल ज़िन्दगी में कर सकते हैं वो आप यहाँ पर भी कर पाएंगे और यहाँ कोई VIP नहीं होगा, कोई दर्शन के लिए लम्बी लाइन नहीं होगी, कोई जल्दी से मंदिर के बाहर नहीं निकालेगा। ईश्वर हर वक़्त आपके समीप होंगे। ये सब होगा आपके मोबाइल पर। जो मंदिर आपके देखने की इच्छा है परन्तु परिस्थितिवश जा नहीं सकते वो आप यहाँ पर देख सकेंगे। कृष्णा कुटुंब आपको भक्ति के एक नए मार्ग पर ले जाएगा। नीचे हम एक वीडियो दे रहे हैं इसे देखिये आपको पता चल जायेगा की वो आभासी मंदिर कैसे होंगे।

    हम कृष्णा कुटुंब पर एक कोर टीम मेंबर्स (Core Team Members) का समुदाय बना रहे हैं जिसमे हम उन लोगों को जोड़ते हैं जो ईश्वर से निस्वार्थ प्रेम करते हैं और समाज से लिए कुछ करना चाहते हैं। ये हमारे कृष्णा कुटुंब का स्तम्भ है। यह वो समुदाय है जो कृष्णा कुटुंब की उच्च टीम से जुड़ा रहता है। ये सदस्य ऐप्प की हर गतिविधि को देखते हैं और तय करते हैं की ऐप्प पर क्या क्या होना चाहिए। अर्थात इस टीम का हिस्सा बनने का अर्थ है कृष्णा कुटुंब के परिवार का हिस्सा बनना। इसका हर सदस्य दुसरे सदस्य की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है। ये कृष्णा कुटुंब को हृदय से प्रेम करते हैं और उसके प्रचार-प्रसार के लिए पूर्णतः सहयोग करते हैं। ये सदस्य कृष्णा कुटुंब के लिए सामग्री बनाते हैं जैसे कहानियां, पूजा विधियाँ, प्रश्न-उत्तर इत्यादि। देश-विदेश में कृष्णा की सीख का और कृष्णा कुटुंब का प्रचार यही सदस्य करेंगे। यही लोग विदेशों में जाकर कृष्णा कुटुंब की गतिविधियों को देखा करेंगे। अर्थात ये समुदाय कृष्णा कुटुंब का कुटुंब है। अगर आप इस कुटुंब का हिस्सा बनना चाहते हैं तो कृपया ऐप्प पर किसी भी कोर टीम मेंबर (Core Team Member) को मैसेज भेज कर कह सकते हैं अथवा इस ईमेल आईडी पर ईमेल भेज सकते हैं - [email protected] अथवा इस मोबाइल नंबर पर व्हाट्सप्प कर सकते हैं - +91-9650647730

    ये था कृष्णा कुटुंब का लक्ष्य और उसका ध्येय।

    हरे कृष्णा

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