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  • रज, सत्व, तम - मनुष्य जीवन के तीन गुण

    मनुष्य जीवन तीन गुणों पर आधारित होता है। जिसने इन पर विजय पा लिया वो संसार में हर बाधा को पार कर सकता है। चलिए जानते हैं इन तीन गुणों के बारे में।

    १. रज गुण - रज गुण हमें स्वार्थी बनाता है। इसके प्रभाव से मनुष्य किसी दुसरे का अहित करने से नहीं चूकता। अपने भले के लिए वो दुसरे का बुरा कर सकता है। जैसे भ्रष्टाचारी अपने चंद रुपयों की खातिर निर्माण में गलत सामग्री लगवा देता है जिससे देश को बहुत अधिक धन हानि होती है और किसी के जीवन - मृत्यु पर भी बन आती है। इसका पूर्ण भार उसी मनुष्य के ऊपर जाता है भले ही वो उसे अपनी गलती स्वीकारे या नहीं। उसके स्वीकारने या न स्वीकारने से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे इस जन्म या अगले जन्म में अपने कर्म का हिसाब चुकाना होता है फिर वो चाहे समाज को या ईश्वर को दोष दे। उसे पाप का दंड तो मिलता ही है।

    २. सत्व गुण - सत्व गुण हमें दयालु और शांत बनाता है परन्तु इसकी पराकाष्ठा पाप को जन्म देती है। मनुष्य को हर जगह सुख, शांति और सच्चाई दिखाई देती है। आभासी शांति को वो सत्य मान लेता है और समाज में हो रहे पाप के विरुद्ध आँखें मूंद लेता है। वो अन्याय को शक्तिशाली होने देता है ये सोच कर कि वो स्वयं न्यायप्रेमी है तो अन्याय स्वयं ही ख़त्म हो जायेगा। धीरे धीरे वो शक्तिशाली अन्याय पाप करने लगता है और उत्पीड़न भी। जैसे एक मच्छर जीव-जंतु है और उसे जीने का पूर्ण अधिकार है। आप जीव प्रेमी हैं और उस प्रेम के चलते आप उसे जीवित छोड़ देते हैं परन्तु वही मच्छर फिर किसी और को काटता है। हो सकता है कि वो किसी छोटे से बच्चे को काट ले और उसे बीमार कर दे। हो सकता है बीमारी में उस बच्चे से प्राण चले जाएँ। दया भाव की पराकाष्ठा भी ठीक नहीं होती। उस पर भी संयम होना चाहिए। सही और गलत में अंतर करने का ज्ञान होना चाहिए वरना आप पाप कर बैठेंगे।

    ३. तम गुण - तम गुण हमारे समक्ष भ्रम जाल पैदा करता है। सब कुछ हमारे सामने होता है परन्तु हम उसे देख नहीं पाते। हो सकता है ईश्वर किसी रूप में हमारे समक्ष आएं परन्तु तम गुण के प्रभाव से हम उन्हें नकार दें क्योंकि जैसे वेश हम समझते हैं वो उस वेश में ना आएं। तम गुण में छलावा पैदा किया जाता है। दिखावे की दुनिया इसी गुण के अंदर आती है।

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