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  • नवरात्री 2017 कहानी - देवी सिद्धिदात्री

    देवी का नौंवा रूप सिद्धिदात्री है अर्थात नवरात्री के नौंवे दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। सिद्धिदात्री का अर्थ होता है सिद्धियों को प्रदान करने वाली। अर्थात देवी दैवीय और ध्यानी शक्तियों को प्रदान करती हैं।

    माता के चार भुजायें हैं और चक्र, गदा, शंख और कमल उनमे सुशोभित हैं। माता पूर्ण रूप से खिले हुए कमल पर विराजमान हैं।

    कुल आठ सिद्धियां होती हैं। सिद्धियों के विषय में विस्तार से जानने के लिए हमारा सिद्धियों वाला लेख पढ़ें। शिव इन आठों सिद्धियों में कुशल हैं और सिद्धिदात्री स्वयं उनकी अर्धांगिनी हैं।

    इस रूप में माता अज्ञानता को दूर करती हैं और दैवीय और सांसारिक सभी सुख प्रदान करती हैं। वे उपलब्धियों और उत्तमता की देवी हैं। सिद्ध, गन्धर्व, यक्ष, असुर और देवता सदैव इनकी पूजा करते रहते हैं।

    माता का मंत्र
    सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।
    सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

    ||जय माँ सिद्धिदात्री ||

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