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  • शरद पूर्णिमा | कोजागरी पूर्णिमा | कुअँर पूर्णिमा

    Akash Mittal

    शरद पूर्णिमा, अश्विन माघ की पूर्णिमा को कहते हैं। यह त्यौहार कृषि सम्बंधित है। इस समय फसल की कटाई होती है। यह मानसून की समाप्ति दर्शाता है। 2017 में शरद पूर्णिमा 5 अक्टूबर को है।

    शरद पूर्णिमा पर चन्द्रमा की पूजा की जाती है जिसे कौमुदी उत्सव कहा जाता है। कौमुदी का अर्थ होता है चन्द्राभा अर्थात चाँद का प्रकाश। गोपियों संग कृष्ण की रासलीला का त्यौहार है ये।

    शरद पूर्णिमा की रात्रि को देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और रात्रि जागरण किया जाता है। कहा जाता है कि एक बार एक राजा अपने बुरे वक़्त से गुज़र रहा था। उसके ऊपर घोर धन संकट था। तब उनकी रानी ने रात्रि जागरण और व्रत करके देवी लक्ष्मी की पूजा की। माता ने प्रसन्न हो कर उनके संकट दूर किये और वो फिर से धन धान्य हो गए। इस दिन रात्रि में देवी लक्ष्मी और इंद्र देव की पूजा की जाती है।

    माना जाता है कि इस दिन चन्द्रमा और पृथ्वी काफी नज़दीक आ जाते हैं और चन्द्रमा की रौशनी में उपचारात्मक तत्व होते हैं जो शरीर और आत्मा को स्वस्थ करते हैं।

    लोगों की मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को देवी लक्ष्मी भ्रमण करती हैं। वो देखती हैं कि कौन कौन जाग रहा है और जो लोग जाग रहे होते हैं उन्हें अपनी दया से कृतार्थ करती हैं। इसलिए ये रात उत्साह की रात होती है। लोग विभिन्न प्रकार के खेल खेलते हैं, बैठक करते हैं, चर्चा करते हैं और प्रेम से पूरी रात जागरण करते हैं। चंद्र की रौशनी में बैठ कर गाने, भजन गाते हैं और अपना मनोरंजन करते हैं।

    लोग इस दिन व्रत रखते हैं और कोई ठोस आहार ग्रहण नहीं करते। वो केवल द्रव्य ग्रहण करते हैं जैसे नारियल पानी, दूध, खीर आदि। दूध पोहा खाने का भी रिवाज है।

    इस जागरण का एक और अर्थ है - सतर्कता। स्वामीनारायण जी कहते हैं कि सतर्कता भी एक प्रकार का तप है। मनुष्य को सतर्क रहना चाहिए ताकि सांसारिक इच्छाएँ जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह उसके ह्रदय में निवास ना कर सकें। धन हो पर उसके प्रति मोह ना हो। सफलता-असफलता, सुख-दुःख, सम्मान-तिरस्कार आदि चीजों से उसका ह्रदय ईश्वर की भक्ति से भटक ना जाए। जो लोग तप, ज्ञान, ध्यान, वैराग्य अर्जित करते हैं परन्तु सतर्क नहीं होते वो माया के प्रभाव में आ ही जाते हैं।

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