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  • जानें नाम क्यों जपना चाहिये, कैसे हो मुक्ति

    शिव केवल नाम नही ये वह शब्द है जो मुझे मेरे आराध्य से जोड़ता है। परमात्मा ही सर्वत्र हैं, संसार मे कुछ नही जो परमात्मा से अलग हो आप भी नही। सर्व और सर्व का सर्वस्व परमात्मा ही हैं। परमात्मा वे हैं जो आप सबके भीतर हैं और बाहर भी। हम उन्हीं परमात्मा के अंश हैं और वे हमारे अंशी।
    किन्तु हमारा यह दुर्भाग्य है कि हम उन्हें छोड़ संसार के अन्य लोगों को अपना मान लेते हैं । यदि आप अन्य सभी में परमात्मा हैं यह ध्यान में रखते हुए उनसे प्रेम करेंगे तो आनंद तथा मुक्ति को प्राप्त होंगे किन्तु हमारी दुविधा ही यही है कि हम सबको अलग अलग मानते हैं और यही हमारे दुखों तथा संसार में बंधन का कारण है।
    शिव सर्वत्र
    शिव शिव शिव

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Krishna Kutumb
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