Loading...

  • करवा चौथ - विवाहित स्त्रियों का विशेष त्यौहार

    करवा चौथ का अर्थ होता है चतुर्थ तिथि पर करवों द्वारा पूजा। करवे मिट्टी के छोटे घड़े होते हैं। ये त्यौहार कार्तिक माघ में शरद पूर्णिमा के बाद चौथे दिन मनाया जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिए पूरे दिन बिना कुछ खाये पिए व्रत करती हैं और रात को चन्द्रमा को अर्क देने के बाद ही व्रत तोड़ती हैं। 2017 में करवा चौथ 8 अक्टूबर को है।

    करवा चौथ मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में ही मनाया जाता है। इसे मनाने की काफी कहानियाँ हैं बाकी ऐसा भी माना जाता है कि पुरुष सेना में होते हैं और वो अपने परिवार से बहुत दूर जोखिमों के बीच घिरे होते हैं। उनकी पत्नी उनकी सुरक्षा के लिए ये व्रत रखती हैं। दूसरा कारण है कि इस समय गेंहू की फ़सल बोई जाती है। मिट्टी के घड़े जिनमें गेंहू रखा जाता है उन्हें करवे कहते हैं। अच्छी फसल की प्रार्थना के साथ व्रत रखा जाता है।

    करवा चौथ मनाने का अन्य कारण है नारी मित्रता का उत्सव। हमारे समाज में विवाह कराने का दायित्व घर के बुजुर्गों को दिया गया है। ऐसे में विवाहिता के लिए पति का घर बिलकुल अनजान होता है। वो वहाँ किसी को नहीं पहचानती। इसलिए विवाह के समय उसकी मित्रता कराई जाती है उसी जगह की किसी विवाहित स्त्री से। इसे कंगन सहेली या धर्म बहन कहा जाता है। ये स्त्री ससुराल वालों से किसी सीधे रिश्ते से नहीं जुडी होती है। कंगन सहेली जीवन भर के लिए एक दुसरे की सहेली बन जाती हैं। वे करवा चौथ से कुछ दिन पहले करवे खरीद कर लाती हैं और उन्हें सजाती हैं। उसमें चूड़ियाँ, फीता, मिठाई, श्रृंगार का सामन और कोई छोटा कपडा रखती हैं। फिर करवा चौथ के दिन एक दुसरे के घर जाकर उन करवों को एक दुसरे को देती हैं। करवा चौथ उनकी मित्रता को सम्मानित करने का उत्सव है।

    करवा चौथ का मुख्य कारण तो स्त्रियों द्वारा अपने सुहाग की लाभ उम्र की कामना के लिए व्रत रखना है।

    Loading Comments...

Other Posts

Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश
Open In App