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  • करवा चौथ की विधि - सरगी, बायना, गौर पूजा, फेरी और फैनी

    Akash Mittal

    करवा चौथ की तैयारी स्त्रियां कुछ दिन पहले से ही शुरू कर देती हैं। श्रृंगार का सामान, गहने, मेहंदी, मिठाई, दिए, करवा, पूजा थाली आदि खरीदती हैं। बाज़ारों में दुकानें सज जाती हैं और सामान की बिक्री शुरू हो जाती है।

    पंजाब में करवा चौथ -

    पंजाब में स्त्रियां सूरज निकलने से पहले ही थोड़ा भोजन और जल ग्रहण कर लेती हैं। सरगी एक विशेष परंपरा है। भोर से पहले के खाने में फेनी खायी जाती है जो सरगी के साथ भेजी जाती है। सरगी को स्त्री की सास भेजती है। अगर सास बहु साथ रहती हैं तो भोर से पहले का भोजन सास पकती है अपनी बहु के लिए। खरीफ की फसल काटने के बाद ही ये त्यौहार आता है इसलिए भी ये समय उत्सव मनाने का होता है। माता-पिता अपनी विवाहित पुत्री और उनके बच्चों के लिए तोहफे भेजते हैं।

    इस दिन स्त्रियां कोई घर का काम नहीं करती हैं। वे अन्य सहेलियों के साथ उत्सव मनाती हैं और एक दुसरे के मेहंदी लगाती हैं।

    शाम को केवल स्त्रियों का एक समारोह होता है। सभी सुन्दर वस्त्र और गहने आदि पहन कर हिस्सा लेती हैं। कुछ जगह पर स्त्रियों दुल्हनों की तरह भी सजती हैं और लाल, सुनहरी या नारंगी रंग के कपडे पहनती हैं। वे सभी एक गोले में बैठ जाती हैं अपनी अपनी थाली के साथ। फिर करवा चौथ की कहानी कही जाती है और बीच बीच में अल्प विराम लिए जाते हैं। इस अल्प विराम में फेरी की जाती है। अर्थात सभी औरतें अपनी थाली को गोले में दूसरी स्त्री के साथ बदलती हैं। पूरी कहानी के दौरान कुल सात फेरियाँ की जाती हैं जिसमें से पहली छः फेरियों में वो बातें बोली जाती हैं वो व्रत के दौरान वर्जित हैं और अंतिम फेरी में व्रत की समाप्ति पर उस प्रतिबन्ध के विरूद्ध बोला जाता है। प्रतिबंदित कार्य होते हैं जैसे रूठे हुए को ना मनायें, सोते हुए को ना जगाएं, सिलाई न करें आदि। इसका गाना कुछ इस प्रकार है -

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    वीरो कुड़िये करवड़ा,

    सर्व सुहागन करवड़ा,

    ए कट्टी नाय टेरी ना,

    खुम्ब चर्खा फेरी ना,

    आन पैर पायी ना,

    सुई च धागा पायी ना,

    रूठड़ा मनाई ना,

    सूतडा जगाई ना,

    बहन प्यारी वीरा,

    चन चढ़े ते पानी पीणा,

    ले वीरो कुडियो करवड़ा,

    ले सर्व सुहागण करवड़ा।

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    और सातवें फेरी पर गाना ये होता है -

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    वीरो कुड़िये करवड़ा,

    सर्व सुहागन करवड़ा,

    ए कट्टी नाय टेरी नी,

    खुम्ब चर्खा फेरी भी,

    आन पैर पायी भी,

    सुई च धागा पायी भी,

    रूठड़ा मनाई भी,

    सूतडा जगाई भी,

    बहन प्यारी वीरा,

    चन चढ़े ते पानी पीणा,

    ले वीरो कुडियो करवड़ा,

    ले सर्व सुहागण करवड़ा।

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    उत्तर प्रदेश और राजस्थान में करवा चौथ -

    उत्तर प्रदेश में व्रत से पहले स्त्रियां फेनी और दूध की खीर खाती हैं। ऐसा कहा जाता है की फेनी और दूध की खीर से दिन में उन्हें ज्यादा प्यास नहीं लगती। राजस्थान और उत्तर प्रदेश दोनों ही जगह पर स्त्रियां करवों को सात बार आपस में बदलती हैं। राजस्थान में स्त्री से सात बार पूछा जाता है -

    धपि की नी धपि (संतुष्ट है या नहीं ?)

    जिसका उत्तर वो देती है -

    जल से धपि, सुहाग से ना धपि (जल से तृप्त हुई पर सुहाग के प्रेम से नहीं)

    इसका अर्थ है कि मैं जल से तृप्त हो चुकी हूँ परन्तु मेरे सुहाग के प्रेम से नहीं अर्थात मुझे जीवन भर अपने सुहाग का प्रेम चाहिए।

    उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गौर पूजा का आयोजन किया जाता है। स्त्रियाँ थोड़ी मिट्टी और जल ले कर उसे मूर्ति का आकार देती हैं। उसे धरती माता मान कर पूजा जाता है। घर की बुजुर्ग महिला करवा चौथ, शिव, पार्वती और गणेश जी की कहानी सुनती हैं। थाली में दीपक जला कर करवा चौथ की कहानी सुनी जाती है। यह कहानी वीरवती की होती है और करवा को सात बार एक दुसरे के साथ बदला जाता है। करवे बदलते समय ये गाया जाता है -

    सदा सुहागन करवे लो, पति की प्यारी करवे लो, सात भाइयों की बहन करवे लो, व्रत करनी करवे लो, सास की प्यारी करवे लो।

    उसके पश्चात बायना मनसा जाता है। अर्थात हलवा, पूरी, नमकीन मठरी, मिठाई आदि गौर माता को अर्पित की जाती हैं और उसे सास या ननद को दिया जाता है।

    इसके बाद सभी जगह पर स्त्रियाँ चन्द्रमा निकलने की राह देखती हैं। अक्सर करवा चौथ की रात को चन्द्रमा देर से निकलते हैं। जैसे ही चन्द्रमा निकल जाता है स्त्रियाँ उसकी छाया पानी में या छलनी के माध्यम से या दुपट्टे से देखती हैं। फिर उसे अर्क दिया जाता है। फिर स्त्रियां अपने पति को भी वैसे ही देखती हैं। माना जाता है कि उस समय अपने व्रत के बल के कारण स्त्रियाँ यम को भी हरा देती हैं अर्थात अपने पति से मृत्यु संकट को दूर कर देती हैं। राजस्थान में स्त्रियाँ इस समय प्रार्थना करती हैं - जैसे सोने का हार और मोतियों की माला, जैसे चन्द्रमा वैसे ही मेरा सुहाग हमेशा चमकता रहे।

    पति फिर थाली से पानी ले कर अपनी पत्नि को पिलाता है और उसे मिठाई खिलाता है। इस प्रकार पत्नि का व्रत टूटता है और वो फिर पूरा भोजन करती है।

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