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  • शरद पूर्णिमा - वलित की कहानी - कोजागरी पूनम

    कोजागरी पूनम की कथा कुछ इस प्रकार है -

    मगधदेश, बंगाल में एक वलित नाम का निर्धन ब्राह्मण रहता था। वो ज्ञानी और संस्कारी व्यक्ति था परन्तु उसकी पत्नी हमेशा उससे झगड़ा करती रहती थी। उन दोनों की इच्छाएँ एक दूसरे से बिलकुल भिन्न थीं। एक बार वलित के पिता के श्राद्ध पर उसकी पत्नी ने वलित के पिता का पिंड (गेंहू के आटे की छोटी सी पोटली) नाली में डाल दिया। विधि के अनुसार पिंड पवित्र नदियों जैसे गंगा आदि में ही सिराय जाता है। पिंड नाली में गिरते देख वलित बहुत क्रोधित हो गए। उन्होंने घर त्याग दिया और प्रण लिया कि जब तक धन नहीं मिलता तब तक घर वापस नहीं आएंगे।

    वो जंगल में चले गए। वहां उन्हें नागकन्याएँ मिली। नागकन्याएँ, कालिआ नाग की वंशज थीं। ये नागकन्याएं कोजागरी व्रत कर रही थीं इसलिए रात में जाग रही थी। वलित के साथ वे जूआ खेलने लगीं। वलित सब कुछ हार गए। उसी क्षण वहां से देवी लक्ष्मी और श्री हरी गुज़र रहे थे। चूँकि वलित ने भी कोजागरी व्रत पूर्ण कर लिया था, देवी लक्ष्मी ने उन्हें कामदेव के समान सौंदर्य प्रदान किया। उनके रूप पर मोहित हो कर नागकन्याओं ने उनसे विवाह कर लिया और अपनी सारी संपत्ति उन्हें सौंप दी। वे वापस अपने घर चले गए और वहाँ उनकी पत्नी ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।

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