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  • नरक चतुर्दशी | काली चौदस | रूप चौदस | छोटी दिवाली

    नरक चतुर्दशी को नरक निवारण चतुर्दशी भी कहते हैं। कार्तिक माघ के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। ये दीपावली से एक दिन पहले आती है और इसे छोटी दीपावली भी कहते हैं।

    नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली राक्षस हुआ करता था जिसका श्री कृष्ण, सत्यभामा और काली ने इसी दिन वध किया था। नरकासुर के प्रहार से श्री कृष्ण के धनुष की प्रत्यंचा टूट गयी थी। वे उसे ठीक कर रहे थे कि उसी समय नरकासुर ने प्रहार कर दिया। सत्यभामा ने वो प्रहार अपने हाथ की हतेली पर लिया और श्री कृष्ण को घायल होने से बचाया। फिर कृष्ण ने सुदर्शन से नरकासुर का वध कर दिया।

    सत्यभामा से प्रसन्न हो कर श्री कृष्ण ने उन्हें कुछ मांगने को कहा तो सत्यभामा ने स्वर्ग का पारिजात पौधा माँगा। जब इंद्र से कृष्ण ने पौधा देने को कहा तो इंद्र ने मना कर दिया। ये पौधा बहुत दिव्य है और स्वर्ग की शोभा है। ये समुद्र मंथन के समय निकला था जिसे नारायण ने इंद्र को दिया था। तब श्री कृष्ण और इंद्र में युद्ध हुआ और देवमाता ने उस युद्ध को रोक कर पारिजाद श्री कृष्ण को दे दिया। परन्तु एक शर्त रखी कि जैसे ही श्री कृष्ण का यज्ञ संपन्न हो जायेगा, पारिजाद वापस इंद्रलोक में आ जायेगा। श्री कृष्ण ने देवमाता का मान रखते हुए शर्त स्वीकार की।

    इसे काली चौदस भी कहा जाता है क्योंकि कुछ जगहों पर ऐसा माना जाता है कि देवी काली ने नरकासुर का वध किया था। ये दिन देवी शक्ति और महाकाली के पूजन का होता है। इस दिन अपने जीवन के नरक अर्थात आलस्य और दुष्टता को त्याग कर जीवन में दीपक के समान रौशनी लानी चाहिए।

    इस त्यौहार को मनाने का एक महत्वपूर्ण कारण फसल की कटाई भी होती है। हमारे देश में त्यौहार फसलों से ही सम्बंधित होते हैं क्योंकि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। इस दिन हनुमान जी को नारियल चढ़ाया जाता है और तेल, पुष्प और चन्दन से पूजा की जाती है। प्रसाद के रूप में तिल, गुड़, पोहा, घी और चीनी की मिठाई बनाते हैं। नयी चावल की फसल से ही चावल ले कर उसके पोहे बनाये जाते हैं।

    गोवा में लोग सुबह चार बजे नरकासुर का पुतला दहन करते हैं। सभी अपने घर जाते हैं और महिलाएं पुरुषों की आरती उतरती हैं और तोफे लेती हैं। करीत नाम का एक कड़वा बेर होता है उसे लोग अपने पैरों से मसलते हैं। इसे नरकासुर और अज्ञानता के अंत का प्रतीक माना जाता है।

    दक्षिण भारत जैसे तमिल नाडु, गोवा, कर्नाटका में दीपावली इसी दिन मनाने का रिवाज़ है। देश के बाकी हिस्सों में दीपावली अगले दिन अमावस्या को मनाई जाती है। दीपावली पर पटाखे फोड़ने का भी रिवाज़ है।

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