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  • राधे राधे जी

    👉बैकुन्ठ नहीं, ब्रह्मलोक नहीं,
    नहीं चाह करूँ देवलोकन की।

    राज और पाठ की चाह नहीं,
    नहीं ऊँचे से कुन्ज झरोकन की॥

    चाह करूँ बस गोकुल की,
    यशोदा और नंद के दर्शन की।

    जिनके अँगना नित खेलत हैं,
    उन श्याम सलोने से मोहन की॥


    🏵 राधे राधे जी 🏵

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