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  • अनामिका में ही क्यों पहनाई जाती है शादी की अंगूठी ।

    सगाई के दौरान लड़की- लड़का दोनों एकदूसरे की अनामिका उंगली में अंगूठी पहनाते हैं ।
    ये अंगूठी अनामिका में ही क्यूँ पहनी जाती है ?
    एक सुंदर प्रयोग बताता हूं..
    आप भी कर के देखें ......
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    बुद्धिजीवियों के अनुसार हमारे हाथ की दसों उंगलियां ये एक कुटुम्ब है ।
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    . हाथ के अंगूठे हमारे माता-पिता का प्रतीक हैं
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    अंगूठे के पास वाली उंगली (तर्जनी) हमारे भाई-बहन की प्रतीक ।
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    बीच की उंगली (मध्यमा) हम खुद
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    चौथी अनामिका...
    मतलब हमारा जोड़ीदार,
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    और अंतिम सबसे छोटी उंगली (करंगली)
    हमारे बच्चे
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    ये हो गया कुटुंब
    अब देखते हैं कुटुंब के लोगों से हमारे संबंध कैसे ईश्वर ने स्थापित किये हैं
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    .अब फोन को एक ओर रख दोनों हाथ नमस्कार मुद्रा में जोड़ें
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    बीच की दोनों उंगली को अंदर की ओर fold कर हथेली से लगा लें ।
    अब दोनो अंगूठे एक दूसरे से दूर करे वो हो जाएंगे
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    .कारण माता-पिता का साथ हमें जन्मभर नही मिलता, कभी न कभी वो हमें छोड़ कर जाते हैं ।
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    अब अंगूठे छोड़ उसके पास वाली उंगली को खोलें
    वो भी खुलेगी
    कारण भाई-बहन का अपना परिवार है , उनका खुद का अपना जीवन है ।
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    अब वो उंगलियां जोड़ हाथ के आखरिवाली सबसे छोटी उंगली को आपस मे खोलें
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    वो भी खुलेंगी, कारण आपके बच्चे बड़े होने पर घोसला छोड़ उड़ान भरने ही वाले हैं ।
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    छोटी उंगलियों को अब जोड़ लें
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    .अब अंगूठी वाली अनामिका को एक दूजे से दूर करे
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    आश्चर्य होगा;
    पर वो दूर नही होती । कारण जोड़ीदार, मतलब पति-पत्नी, जीवनभर एक साथ रहने वाले होते हैं । सुख और दुःख में एक दूजे के जीवनसाथी.....
    "ये आयुष्य का सुंदर अर्थ
    अनामिका सिवाय सब व्यर्थ"

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