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  • 🌞ईश्वरत्व का अनुभव {१} 🙏 हरे कृष्णा

    कुछ लोग प्रश्न करते हैं कि *क्या ईश्वर को आँखों से देखा जा सकता है?* वे कहते हैं कि यदि यह संभव नहीं है तो ईश्वर के अस्तित्व पर ही विश्वास नहीं किया जा सकता।

    मानव सीमित है। वे लोग यह नहीं समझते कि दृष्टि, श्रवणशक्ति, सभी सीमित हैं।

    ---> बिजली की तार में बिजली को देखा नहीं जा सकता परन्तु इस कारण से यह तो कहा नहीं जा सकता कि बिजली नहीं है। छूने से झटका लगता है। वह अनुभव है।

    --->एक पक्षी आकाश की ऊँचाईयों में उडता जाता है। इतना ऊँचा उडता है की दृष्टि से ओझल हो जाती है। क्या इसपर यह कहा जा सकता है कि चूँकि वह दृष्टिगोचर नहीं है उसका अस्तित्व नहीं है?

    ---> ऐसा कहना कि मैं तो केवल उसी में विश्वास करूँगा जो मैं देख सकता हूँ, बिल्कुल युक्तिहीन है। मानो किसी व्यक्ति की हत्या हो गई। हजारों लाखों लोगों ने यह हादसा अपनी आँखों से देखा नहीं परन्तु न्यायाधीश को इनके कथन से कुछ लेना देना नहीं है। उनका फैसला तो एक चश्मदीद गवाह के बयान पर निर्भर है। उसी प्रकार जितने ही लोग बोलें कि ईश्वर का अस्तित्व नहीं है, पर प्रमाण तो ईश्वरसिद्ध ऋषि-मुनियों के वचनों को ही माना जाएगा।

    ---> एक व्यक्ति जो ईश्वर के अस्तित्व को नकारता रहता था एक दिन किसी के घर गया। वहाँ भूगोल के एक छोटे प्रतिरूप को देख कर उसने पूछा, “ओह, कितना सुन्दर है! किसने बनाया है?” यह सुनकर उसके आस्तिक मित्र ने कहा, “यदि कृत्रिम भूगोल बनाने के लिए किसी की आवश्यकता है तो यथार्थ भूमि का भी तो कोई स्रष्टा रहा होगा?”

    ---> बीज में ही वृक्ष निहित है पर बीज को देखने से या उसे काट खोलने पर वृक्ष की उपस्थिति का भान नहीं होता। उस बीज को बो दो, सिचाई करो। श्रम करो। तो उसमें से अंकुर फूटेगा, पौधा उगेगा। केवल वाद-विवाद करने से कोई लाभ नहीं है, परिश्रम आवश्यक है। तब अनुभूति होगी। एक भौतिकवादी शास्त्रज्ञ को भी किए जाने वाले परीक्षण में विश्वास होता है। हालाँकि बहुत से परीक्षण असफल भी हो जाते हैं तब भी वे प्रयत्न जारी रखते हैं। उनमें विश्वास होता है कि वे अगले परीक्षण में सफलता पाएँगे। एक डॉक्टर बनने में या इंजिनीयर बनने में कितने वर्ष लग जाते हैं? कोई नहीं कहता कि इतने वर्ष प्रतीक्षा करना उनके लिए संभव नहीं है। इतने साल के निरन्तर प्रयास के फलस्वरूप ही वे डॉक्टर या इंजिनीयर बन पाते हैं।

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